यूपी सियासत: चुनाव से पहले कांग्रेस के नए प्रभारी के बयान से सपा के साथ ‘सीट शेयरिंग’ पर सस्पेंस गहराया
यूपी सियासत: चुनाव से पहले कांग्रेस के नए प्रभारी के बयान से सपा के साथ ‘सीट शेयरिंग’ पर सस्पेंस गहराया
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अप्रैल 2027 के आसपास होने वाले विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों का समय बाकी है, लेकिन सूबे की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। कांग्रेस पार्टी द्वारा शुक्रवार को राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी नियुक्त किए जाने के तुरंत बाद राज्य का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। राजेंद्र पाल गौतम ने अजय कुमार लल्लू की जगह ली है और उनके आते ही समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ होने वाले गठबंधन के फॉर्मूले को लेकर सस्पेंस गहरा गया है।
राजेंद्र पाल गौतम ने कड़े संकेत देते हुए कहा है कि इस बार गठबंधन में “बराबरी की हिस्सेदारी” होगी। इसके साथ ही उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती के सम्मान की बात करते हुए कहा कि अगर वह बुलाएंगी, तो वे उनसे मिलने जरूर जाएंगे। इस बयान के बाद कॉकटेल सियासत के नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।
अजय कुमार लल्लू की जगह राजेंद्र पाल गौतम को कमान
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने संगठन में यह बड़ा फेरबदल किया है। राजेंद्र पाल गौतम को प्रभारी बनाकर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में एक नए सामाजिक समीकरण (अगड़ा-दलित-पिछड़ा) को साधने की कोशिश कर रही है।
मौजूदा स्थिति: यूपी कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष अजय राय हैं, जो अगड़ी जाति से आते हैं। अब राजेंद्र पाल गौतम (दलित चेहरा) के प्रभारी बनने से कांग्रेस सूबे में ‘अगड़ा-दलित’ गठजोड़ मजबूत करना चाहती है।
सपा का कोर बैंक: समाजवादी पार्टी के पास पहले से ही मजबूत पिछड़ा और अल्पसंख्यक (PDA) वोट बैंक है। कांग्रेस इस वोट बैंक के साथ अपने नए समीकरण को जोड़कर सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाना चाहती है।
लोकसभा का ’43 सीटों वाला’ हिट फॉर्मूला बनाम विधानसभा की हकीकत
2022 के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज 2 सीटों पर सिमट गई थी, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठबंधन ने कमाल का प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से इस गठबंधन ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इसी बड़ी कामयाबी के दम पर दोनों दल यह मानकर चल रहे हैं कि 2027 में भी गठबंधन अटूट रहेगा। अखिलेश यादव वर्तमान में उत्तर प्रदेश के हर जिले का दौरा कर जमीनी हकीकत और अपनी पार्टी के दबदबे वाली सीटों का आकलन कर रहे हैं।
सीट बंटवारे पर मोलभाव होना तय
हालांकि कांग्रेस और सपा के जमीनी नेताओं का दावा है कि गठबंधन को लेकर शीर्ष नेतृत्व (अखिलेश यादव और राहुल गांधी) के बीच कोई मतभेद नहीं है और समय आने पर मिलकर सीटें तय कर ली जाएंगी, लेकिन नए प्रभारी के “बराबरी की हिस्सेदारी” वाले बयान ने यह साफ कर दिया है कि सीटों की संख्या को लेकर इस बार भारी मोलभाव (Bargaining) होने वाला है। सपा जहां लोकसभा के प्रदर्शन के आधार पर खुद को ‘बड़े भाई’ की भूमिका में देख रही है, वहीं कांग्रेस अब बैकफुट पर रहने के मूड में नहीं दिख रही है। इस बयान पर फिलहाल समाजवादी पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
