अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों में हिले धरती के तार
अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों में हिले धरती के तार
नई दिल्ली: शनिवार की शाम अफगानिस्तान का हिंदूकुश क्षेत्र एक शक्तिशाली भूकंप के झटकों से दहल उठा। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 6.2 मापी गई है। इस तेज भूकंप के असर से न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्र में भी धरती हिल गई। गनीमत यह रही कि अत्यधिक तीव्रता के बावजूद फिलहाल किसी भी देश से जान-माल के बड़े नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है।
भूकंप का समय और सटीक केंद्र
नेशनल जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (National Center for Seismology) के आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप शाम ठीक 7 बजकर 4 मिनट पर आया।
भौगोलिक स्थिति: इसका केंद्र पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में कालाफगान से करीब 81 किलोमीटर दूर, 36.442° उत्तरी अक्षांश और 70.672° पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया।
गहराई: यह भूकंप जमीन की सतह से 215 किलोमीटर की अत्यधिक गहराई (Deep-focus earthquake) में स्थित था।
8 देशों में महसूस किए गए झटके
भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से काफी नीचे (गहराई में) होने के कारण इसकी तरंगें बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैल गईं। यही वजह रही कि इसके झटके एक साथ कई देशों में महसूस किए गए:
भारत (विशेषकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर)
पाकिस्तान (इस्लामाबाद, खैबर पख्तूनख्वा और स्वात घाटी)
चीन
ताजिकिस्तान
उज्बेकिस्तान
किर्गिस्तान
तुर्कमेनिस्तान
अफगानिस्तान (मूल केंद्र)
गहराई ने टाला बड़ा खतरा: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
भू-वैज्ञानिकों और भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार, जो भूकंप धरती की गहराई में आते हैं, उनकी ऊर्जा सतह तक पहुंचते-पहुंचते काफी हद तक बिखर (Dissipate) जाती है।
राहत की वजह: ऐसे गहरे भूकंपों के झटके बहुत व्यापक इलाके (हजारों किलोमीटर दूर तक) में तो महसूस होते हैं, लेकिन सतह पर उनकी विनाशकारी क्षमता काफी कम हो जाती है। यही वजह है कि 6.2 जैसी बड़ी तीव्रता के बाद भी इमारतों के गिरने या बड़े पैमाने पर तबाही जैसी स्थिति नहीं बनी। इसके विपरीत, कम गहराई (Shallow) वाले भूकंप कम इलाके में आते हैं पर बेहद विनाशकारी होते हैं।
जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में दहशत का माहौल
भले ही जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन झटके इतने तेज थे कि लोगों में डर बैठ गया। जम्मू-कश्मीर में भूकंप आते ही लोग घबराकर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए और खुले मैदानों व सड़कों की तरफ भागे। कश्मीर घाटी वैसे भी भूकंपीय जोन (Seismic Zone) के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जाती है। वहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान के स्वात और सीमावर्ती इलाकों में भी महिलाएं और बच्चे खौफ के मारे घरों से बाहर निकलकर रोते और दुआएं मांगते नजर आए।
