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अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में 3% तक की भारी गिरावट, ब्रेंट क्रूड $80 के नीचे फिसला

अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में 3% तक की भारी गिरावट, ब्रेंट क्रूड $80 के नीचे फिसला

​ग्लोबल मार्केट: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई कूटनीतिक वार्ता के बाद वैश्विक तेल बाजार में सोमवार को बड़ी हलचल देखने को मिली। सप्लाई में रुकावट की आशंकाएं कम होने और ईरान के तेल निर्यात बढ़ने की उम्मीद के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में 3 प्रतिशत तक की तेज गिरावट दर्ज की गई।

​ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड के दाम गिरे

​सोमवार को कारोबार के दौरान तेल की कीमतों में आई गिरावट इस प्रकार रही:

​ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से अधिक टूटकर 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई। गौरतलब है कि सोमवार को कारोबार की शुरुआत में यह 82 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था।

​डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude): अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड की कीमत में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

​कीमतों में यह कमी तब आई है जब दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता का पहला दौर समाप्त हुआ, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व में तनाव को कम करना और युद्धविराम को मजबूत करना था। इससे पहले पिछले सप्ताह भी तेल की कीमतों में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

​प्रतिबंधों में ढील और फंसी संपत्तियों पर बनी सहमति

​ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस वार्ता के सकारात्मक परिणामों की पुष्टि करते हुए कहा कि तेहरान को तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात के लिए विशेष छूट (वेवर) मिली है। इसके अलावा, ईरान की कुछ फंसी हुई संपत्तियों (फ्रीज्ड फंड्स) को जारी करने और देश में पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यक्रम शुरू करने पर भी सहमति बनी है।

​विशेषज्ञों की राय: अनिश्चितता के बीच बाजार सतर्क

​बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद ब्रेंट क्रूड का 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना यह दर्शाता है कि बाजार फिलहाल किसी बड़े सैन्य संघर्ष की संभावना को नहीं मान रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि भू-राजनीतिक स्थिति पल-पल बदल रही है।

​विशेषज्ञों के अनुसार:

​”वैश्विक निवेशकों का रुख अभी भी बेहद सतर्क बना हुआ है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजार मिले-जुले और कमजोर संकेतों के साथ खुले, क्योंकि ऐसी खबरें भी आईं कि नए भू-राजनीतिक तनाव के बाद ईरान ने वार्ता से खुद को अलग कर लिया है।”

​भारत जैसे आयातक देशों को मिलेगी बड़ी राहत

​कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट का सकारात्मक असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला, जहां सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।

​इसके अलावा, कच्चे तेल का सस्ता होना भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए एक बड़ी राहत है। इससे देशों की आयात लागत कम होगी, घरेलू स्तर पर महंगाई का दबाव घटेगा और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करने में भी बड़ी मदद मिल सकती है।

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