अमेरिकी धमकियों के बाद ईरान ने स्विट्जरलैंड वार्ता से खुद को किया अलग, ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
अमेरिकी धमकियों के बाद ईरान ने स्विट्जरलैंड वार्ता से खुद को किया अलग, ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
जिनेवा/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में चल रही अगले चरण की कूटनीतिक बातचीत में एक बड़ा गतिरोध सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अमेरिका की लगातार धमकियों के बाद उसने स्विट्जरलैंड में अमेरिका, कतर और पाकिस्तान के साथ चल रही चार-पक्षीय (Quadripartite) वार्ता में अपनी भागीदारी तुरंत प्रभाव से रोक दी है। हालांकि, इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के वॉकआउट की खबरों को पूरी तरह से खारिज और झूठा करार दिया था।
धमकी भरे माहौल में बातचीत संभव नहीं: ईरान
ईरानी मीडिया ‘तस्नीम न्यूज एजेंसी’ के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि चार-पक्षीय बैठक के दौरान अमेरिका की ओर से दिए गए धमकी भरे बयानों के कारण तेहरान ने यह सख्त कदम उठाया है। तेहरान ने साफ किया है कि वह ऐसी डराने-धमकाने वाली परिस्थितियों में बातचीत जारी नहीं रखेगा।
कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने मध्यस्थता करते हुए बातचीत को पटरी पर लाने की कोशिश की, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक में शामिल न होने के अपने फैसले पर अड़ा रहा। ईरानी पक्ष ने जोर देकर कहा कि दूसरे पक्ष को अपने वादों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने खासकर इजरायल द्वारा लेबनान में सीजफायर (युद्धविराम) के लगातार उल्लंघन और वादों को तोड़े जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
डोनाल्ड ट्रंप की ‘ट्रूथ सोशल’ पर खुली चेतावनी
यह कूटनीतिक गतिरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आया है, जो उन्होंने बातचीत जारी रहने के दौरान ही साझा किया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर तेहरान को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए लिखा:
”ईरान को लेबनान में अपने ज्यादा पैसे वाले प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह) को परेशानी पैदा करने से तुरंत रोकना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था, बस और ज्यादा जोरदार!!!”
अमेरिका ने दावों को बताया था झूठा, कहा- वार्ता अब भी सक्रिय
ईरान की ओर से भागीदारी रोकने के आधिकारिक बयान से पहले, अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था कि ईरानी दल बातचीत बीच में छोड़कर चला गया है। अमेरिकी पक्ष का कहना था कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा शुरू की गई यह कूटनीतिक चर्चा सक्रिय है।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था, “ईरानी प्रतिनिधिमंडल के जाने की खबरें पूरी तरह झूठी हैं। वे यहीं मौजूद हैं और बातचीत चल रही है। हमें उम्मीद है कि हम इस पर रातभर काम करते रहेंगे।” अमेरिका को भरोसा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान में नाजुक युद्धविराम पर प्रारंभिक प्रगति हासिल की जा रही है।
इन मुख्य मुद्दों पर केंद्रित थी बातचीत
इस हफ्ते की शुरुआत में हुए अमेरिका-ईरान समझौते के बाद यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही थी, जिसमें निम्नलिखित मुद्दों पर फोकस किया जा रहा था:
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz): स्ट्रेट को लेकर ईरान के कुछ भ्रमित करने वाले संदेशों को साफ करना और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरी तरह से खुला रखने व विवादों को खत्म करने के लिए एक स्थाई मैकेनिज्म (तंत्र) तैयार करना।
लेबनान सीजफायर: लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच फिर से भड़की लड़ाई को शांत करना। अमेरिकी राजनयिकों के अनुसार, वे दक्षिणी लेबनान में विवाद खत्म करने और युद्धविराम को कड़ाई से लागू करने के मैकेनिज्म पर काम कर रहे थे।
