वेब सीरीज ‘राख’ में बिना डायलॉग्स के सोनाली बेंद्रे ने जीता दिल, कहा- “किरदार मेरे साथ घर तक चला आता था”
वेब सीरीज ‘राख’ में बिना डायलॉग्स के सोनाली बेंद्रे ने जीता दिल, कहा- “किरदार मेरे साथ घर तक चला आता था”
मुंबई: ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर हाल ही में रिलीज हुई नई क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज ‘राख’ (Raakh) को दर्शकों और समीक्षकों से काफी शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। 1970 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरीज की कहानी, थ्रिलर और बेहतरीन स्टारकास्ट की हर तरफ चर्चा हो रही है। खासकर, लंबे समय बाद स्क्रीन पर वापसी करने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे का अनोखा किरदार दर्शकों का ध्यान खींच रहा है। इस सीरीज में सोनाली ने एक ऐसा रोल निभाया है जिसमें डायलॉग्स (संवाद) बेहद कम हैं और उन्होंने अपनी खामोशी व आंखों के जरिए गहरे जज्बात बयां किए हैं। सोनाली ने समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) से बातचीत में इस चुनौतीपूर्ण किरदार के अपने अनुभवों को साझा किया।
मजबूत कहानी ने काम को बनाया आसान
सोनाली बेंद्रे ने बताया कि सीरीज की दमदार स्क्रिप्ट ने उनके अभिनय को एक मजबूत आधार दिया। उन्होंने कहा, “मेरे पास काम करने के लिए बहुत अच्छा कंटेंट था। सच कहूं तो मेरा 50 प्रतिशत से ज्यादा काम पहले ही हो चुका था। कहानी और माहौल ने मुझे इतनी मजबूती दी कि मुझे अपने किरदार को अलग से गढ़ने के लिए ज्यादा एक्स्ट्रा मेहनत नहीं करनी पड़ी।”
डायलॉग्स न होने पर सोनाली का दिलचस्प खुलासा
किरदार में संवाद न होने को लेकर सोनाली ने एक मजेदार और व्यावहारिक बात साझा की। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरे किरदार में डायलॉग्स न होना एक बिल्कुल अलग अनुभव था। अब मेरी पहले जैसी याददाश्त नहीं रही, इसलिए लंबे-लंबे डायलॉग याद करना मेरे लिए थोड़ा मुश्किल हो जाता है। लेकिन इस किरदार में डायलॉग्स की जरूरत ही नहीं थी, तो यह बात मेरे लिए एक तरह से आसान और मजेदार साबित हुई, क्योंकि मेरा पूरा फोकस सिर्फ भावनाओं पर था।”
बिना शब्दों के अभिनय करना था बड़ी चुनौती
सोनाली ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना संवादों के एक्टिंग करना उतना आसान नहीं होता जितना स्क्रीन पर दिखाई देता है। उन्होंने कहा, “जब आपके पास शब्द नहीं होते, तो चुनौती और बढ़ जाती है। इस तरह के किरदार में आपको हर एक भावना को अंदर से गहराई से महसूस करना पड़ता है और उसे बिना कुछ बोले सिर्फ अपने चेहरे के हाव-भाव, आंखों और छोटे-छोटे शारीरिक इशारों (Gestures) से दर्शकों तक पहुंचाना होता है। यह एक अलग तरह की मेहनत है, जहां कलाकार को शब्दों का सहारा नहीं मिलता।”
”किरदार मेरे साथ घर तक चला आता था”
किरदार की भावनात्मक गहराई और मानसिक संघर्ष के बारे में बात करते हुए सोनाली ने बताया कि इस भूमिका का उन पर व्यक्तिगत रूप से भी गहरा असर पड़ा। उन्होंने कहा, “मेरे किरदार में एक आंतरिक संघर्ष था। जब आप किसी ऐसे गंभीर और संवेदनशील किरदार को इतनी गहराई से जीते हैं, तो शूटिंग खत्म होने के बाद उसे तुरंत दिमाग से निकालना आसान नहीं होता। कई बार पैकअप होने के बाद भी मैं उस किरदार की उदासी और भावनाओं से बाहर नहीं निकल पाती थी। कभी-कभी तो ऐसा लगता था कि मेरा यह किरदार मेरे साथ मेरे घर तक चला आया है, जो मानसिक रूप से थोड़ा डरावना और थका देने वाला अनुभव था।”
’राख’ सीरीज अपनी सस्पेंस से भरी कहानी और किरदारों के संजीदा अभिनय के दम पर इस समय ओटीटी की सबसे चर्चित सीरीज में से एक बन चुकी है, जिसे लोग प्राइम वीडियो पर खूब पसंद कर रहे हैं।
