शिवसेना (उद्धव गुट) में टूट की अटकलों पर संजय राउत का पलटवार: ‘हम सांसद-विधायक बनाते हैं, बेईमानों को कब तक रोकेंगे’
शिवसेना (उद्धव गुट) में टूट की अटकलों पर संजय राउत का पलटवार: ‘हम सांसद-विधायक बनाते हैं, बेईमानों को कब तक रोकेंगे’
मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट में ‘ऑपरेशन टाइगर’ और संभावित टूट की खबरों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विरोधी गुट पर तीखा हमला बोला है। एक विशेष बातचीत में संजय राउत ने पार्टी में किसी भी तरह की फूट की खबरों को सीधे तौर पर तो नहीं स्वीकारा, लेकिन पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर कड़ा तंज कसा।
’हम नेता बनाते हैं, बेईमानों का कुछ नहीं कर सकते’
पार्टी में असंतोष और इस्तीफों की अटकलों पर बात करते हुए संजय राउत ने कहा, “शिवसेना एक मजबूत पार्टी है, जिसे बालासाहेब ठाकरे ने अपने खून-पसीने से सींचा है। यह पार्टी किसी सांसद या विधायक के भरोसे नहीं चलती, बल्कि हम लोग सांसद और विधायक बनाते हैं। इसके बाद भी अगर कोई बार-बार पार्टी छोड़कर जाता है, तो ऐसे बेईमान लोगों को आप कितने दिनों तक पकड़कर रख सकते हैं? जो होता है, उसे देख लेंगे।”
उद्धव ठाकरे की बैठक और सांसदों की अनुपस्थिति पर सफाई
हाल ही में मुंबई में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के कुल 9 सांसदों में से केवल 4 ही व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे, जबकि शेष 5 सांसद वर्चुअली जुड़े। इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं कि उद्धव गुट के कुछ सांसद जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, उद्धव गुट के सांसद अरविंद सावंत ने इन अटकलों को खारिज करते हुए दावा किया कि कुछ सांसद जरूरी और पूर्व-निर्धारित कामों की वजह से बैठक में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो पाए थे, लेकिन वे पूरी तरह पार्टी के साथ हैं।
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात पर बोले राउत- ‘यह कोई अपराध नहीं’
यवतमाल-वाशिम से उद्धव गुट के सांसद संजय देशमुख की दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से हुई मुलाकात के बाद इन कयासों को और हवा मिली है। इस मुलाकात पर बचाव करते हुए संजय राउत ने कहा, “किसी केंद्रीय मंत्री से मिलना कोई अपराध नहीं है। मैं एक सांसद हूं और वे कैबिनेट मंत्री हैं, जिन्हें देश की सेवा के लिए नियुक्त किया गया है। अगर मुझे या किसी अन्य सांसद को अपने क्षेत्र का कोई काम होगा, तो हम प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री या धर्मेंद्र प्रधान से क्यों नहीं मिलेंगे? काम के सिलसिले में मंत्रियों से मिलना बेहद सामान्य प्रक्रिया है।”
अटकलों का बाजार गर्म: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित तौर पर 20 सांसदों के टूटने की खबरों के बाद से ही महाराष्ट्र की राजनीति में भी यह चर्चा जोरों पर है कि शिवसेना (UBT) अगला निशाना हो सकती है। फिलहाल पार्टी के शीर्ष नेता इन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर रहे हैं।
