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सुप्रीम कोर्ट का केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग को नोटिस: ‘आधार’ को सिर्फ पहचान पत्र के रूप में सीमित करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग को नोटिस: ‘आधार’ को सिर्फ पहचान पत्र के रूप में सीमित करने की मांग

​नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के उपयोग के दायरे को लेकर एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में मांग की गई है कि आधार का उपयोग केवल एक पहचान पत्र (Identity Proof) के रूप में किया जाना चाहिए, न कि नागरिकता, निवास या जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर।

​सिर्फ पहचान साबित करने के लिए हो आधार का इस्तेमाल

​याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि आधार अपनी कानूनी सीमाओं से आगे बढ़कर विभिन्न प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रियाओं का हिस्सा बन चुका है। याचिका में अदालत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि केंद्र, राज्य और चुनाव आयोग आधार को नागरिकता, निवास/डोमिसाइल, पते या जन्मतिथि के दस्तावेजी प्रमाण के रूप में स्वीकार न करें। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से नए मतदाता पंजीकरण के ‘फॉर्म-6’ में आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

​कमजोर सत्यापन प्रक्रिया और अवैध प्रवासियों का मुद्दा

​याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान में आधार पंजीकरण की सत्यापन प्रक्रिया काफी कमजोर है, जिसका फायदा उठाकर घुसपैठिए और अवैध प्रवासी भी आसानी से आधार कार्ड बनवा लेते हैं।

​सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग पर चिंता

​दलील के अनुसार, एक बार आधार कार्ड मिलने के बाद अवैध प्रवासी इसे मुख्य आधारभूत दस्तावेज (Base Document) बनाकर राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, डोमिसाइल प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और अंततः मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) तक हासिल कर लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप, वे वास्तविक भारतीय नागरिकों के लिए निर्धारित केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं, आरक्षण और अन्य नागरिक लाभों का अवैध रूप से फायदा उठा रहे हैं।

​याचिका में कहा गया है कि आधार का इस तरह का व्यापक इस्तेमाल आधार एक्ट, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के सिद्धांतों के विपरीत है, इसलिए इसे अवैध और अप्रभावी घोषित किया जाना चाहिए। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

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