उत्तराखंड के पहाड़ों में रहस्य: दयारा बुग्याल, पिंडारी और फूलों की घाटी से तीन पर्यटक लापता; रेस्क्यू में जुटीं SDRF और NDRF की टीमें
उत्तराखंड के पहाड़ों में रहस्य: दयारा बुग्याल, पिंडारी और फूलों की घाटी से तीन पर्यटक लापता; रेस्क्यू में जुटीं SDRF और NDRF की टीमें
देहरादून / उत्तरकाशी:
उत्तराखंड की खूबसूरत और बर्फ से ढकी पर्वतीय वादियां, बुग्याल और ग्लेशियर हर साल देश-विदेश के हजारों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन इन दिनों राज्य के तीन सबसे प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट्स (Trekking Routes) किसी खूबसूरत वजह से नहीं, बल्कि एक बेहद चिंताजनक और रहस्यमयी घटनाक्रम के कारण चर्चा में हैं। राज्य के तीन अलग-अलग ट्रैक से तीन पर्यटक लापता हो गए हैं, जिनका हाई-टेक सर्च ऑपरेशन के बावजूद अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
लापता पर्यटकों की तलाश के लिए पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय प्रशासन जमीन से लेकर आसमान (हेलीकॉप्टर और ड्रोन) तक छान मार रहे हैं, लेकिन फिलहाल हाथ खाली हैं।
1. दयारा बुग्याल से गायब बबीता पांडे बनीं सबसे बड़ी पहेली
सबसे ज्यादा चर्चा उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई बबीता पांडे की हो रही है। बबीता पिछले दो सप्ताह से रहस्यमयी ढंग से लापता हैं।
खोज अभियान: एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों का दल जंगलों, गहरी खाइयों, ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों, तालाबों और जल स्रोतों की खाक छान चुका है। अब बबीता की तलाश में हेलीकॉप्टर की मदद से हवाई निगरानी भी की जा रही है।
चुनौतियां: समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल वैसे तो बेहद खूबसूरत है, लेकिन यहां अचानक मौसम बदलना, घना कोहरा छा जाना और जंगलों के भीतर बनी अनौपचारिक पगडंडियां ट्रेकर्स में दिशा भ्रम (रास्ता भटकना) पैदा कर देती हैं। मुख्य रास्ते से थोड़ा भी भटकने पर घने जंगलों में वापसी बेहद मुश्किल हो जाती है।
2. पिंडारी ग्लेशियर पर अभिषेक चौहान की तलाश; नदी किनारे मिला सामान
दूसरी घटना बागेश्वर जिले के पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक की है। उत्तर प्रदेश के शामली निवासी अभिषेक चौहान 28 मई को ट्रेकिंग पर गए थे। 29 मई को वापसी के दौरान खाती गांव से 7-8 किलोमीटर पहले ‘छिल्याणी गधेरे’ के पास वे अचानक लापता हो गए। उनके साथ मौजूद गाइड और पोर्टर ने खाती गांव पहुंचकर इसकी सूचना प्रशासन को दी।
बरामद सामान: शुरुआती खोज में घटनास्थल के पास से अभिषेक का कैमरा मिला। इसके बाद पिंडर नदी के समीप उनका रेनकोट और कैप भी बरामद हुई है, जिससे अनहोनी की आशंका बढ़ गई है।
क्राइम सीन री-क्रिएशन: सीईओ अजय साह के नेतृत्व में पुलिस, वन विभाग और फायर सर्विस सहित करीब 50 सदस्यीय संयुक्त टीम अभियान चला रही है। परिस्थितियों को समझने के लिए घटना का री-क्रिएशन भी कराया गया है। पिंडर नदी के दोनों किनारों और पुलों पर गोताखोरों की मदद ली जा रही है।
3. विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ से हरियाणा के गब्बर सिंह लापता
तीसरा मामला चमोली जिले की विश्व प्रसिद्ध ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ (फूलों की घाटी) का है। हरियाणा के फरीदाबाद निवासी 48 वर्षीय पर्यटक गब्बर सिंह मंगलवार को फूलों की घाटी घूमने पहुंचे थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। उनका मोबाइल फोन भी बंद (आउट ऑफ कवरेज) आ रहा है।
खोज में बाधा: नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन के अनुसार, क्षेत्र में लगातार खराब चल रहा मौसम और भारी बारिश खोज अभियान में बड़ी बाधा बन रही है।
चुनौतियां: फूलों की घाटी में कई जगहों पर अत्यधिक फिसलन वाले रास्ते, तीखी ढलानें और घना कोहरा रहता है। चूंकि गब्बर सिंह अकेले ही घाटी में घूमने गए थे, इसलिए बिना किसी गाइड के उनकी सटीक लोकेशन ट्रैक करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
तीन घटनाओं में एक जैसी तस्वीर: पहाड़ों की अप्रत्याशित चुनौतियां
इन तीनों मामलों का बारीकी से विश्लेषण करने पर एक जैसी समानताएं सामने आती हैं:
सभी पर्यटक उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय लेकिन भौगोलिक रूप से बेहद कठिन और संवेदनशील ट्रेकिंग क्षेत्रों में लापता हुए हैं।
पहाड़ों की अप्रत्याशित परिस्थितियां, अचानक मौसम का बदलना, मोबाइल नेटवर्क (संचार व्यवस्था) का न होना और दुर्गम भूभाग ऐसी घटनाओं को और जटिल बना देते हैं।
कई बार ट्रेकर्स द्वारा स्थापित सुरक्षा नियमों की अनदेखी या अकेले सफर करना भी भारी पड़ता है।
फिलहाल राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह अलर्ट पर हैं। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और ट्रेकिंग एजेंसियों से अपील की है कि वे खराब मौसम और प्रतिकूल परिस्थितियों में नियमों का सख्ती से पालन करें और बिना गाइड के किसी भी दुर्गम रूट पर न जाएं।
