Saturday, June 13, 2026
राजनीति

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की फूट गहरी: बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी का दावा—64 विधायकों ने स्पीकर को सौंपी सूची, फ्लोर टेस्ट को तैयार

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की फूट गहरी: बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी का दावा—64 विधायकों ने स्पीकर को सौंपी सूची, फ्लोर टेस्ट को तैयार

​कोलकाता:

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ा आंतरिक विवाद अब एक बड़े विभाजन का रूप लेता जा रहा है। विधानसभा में बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने शुक्रवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 64 बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को अपने नामों की सूची सौंप दी है।

​बागी विधायकों की यह संख्या विधानसभा में टीएमसी के कुल संख्याबल के दो-तिहाई हिस्से से भी अधिक है, जो दलबदल विरोधी कानून के तहत कानूनी रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। बनर्जी ने कहा कि अगर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को जरूरी लगता है, तो वे सदन में ‘फ्लोर टेस्ट’ (बहुमत परीक्षण) का आदेश दे सकते हैं।

​संसद की तर्ज पर विधानसभा में बगावत

​ऋतब्रत बनर्जी ने यह बयान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नवनिर्वाचित विधायक देवांग्शु पांडा और टीएमसी की स्वाति खांडेकर के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद दिया। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना संसदीय बगावत से की।

​बनर्जी ने कहा, “जिस तरह बागी सांसदों ने संसद में लोकसभा स्पीकर को अपनी सूची सौंपी थी, ठीक उसी तरह बागी टीएमसी विधायकों ने भी विधानसभा स्पीकर को अपनी लिस्ट दे दी है। अभी हमारे खेमे में 64 विधायक आ चुके हैं। हम सदन के पटल पर साबित कर देंगे कि हमारे साथ कितना संख्याबल है।” उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में कुछ और विधायक भी ममता बनर्जी के आधिकारिक गुट को छोड़कर उनके साथ आ सकते हैं।

​सोमवार या मंगलवार तक स्थिति होगी और साफ

​तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद और अब विधानसभा में बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने उम्मीद जताई कि अगले सप्ताह की शुरुआत तक उनके खेमे की वास्तविक ताकत पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा, “हमारे गुट की संख्या और बढ़ेगी या नहीं, यह सोमवार या मंगलवार तक सबके सामने आ जाएगा।”

​हालांकि, उन्होंने व्यक्तिगत नेताओं को लेकर चल रही अटकलों पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इनमें कोलकाता के पूर्व मेयर और वरिष्ठ टीएमसी नेता फिरहाद हकीम का नाम सबसे प्रमुख है। फिरहाद हकीम की बागी गुट के नेताओं से हुई हालिया मुलाकातों ने राज्य के सियासी बाजार को गर्म कर दिया है। गुरुवार को विधानसभा की कार्यवाही से उनकी अनुपस्थिति ने इन कयासों को और हवा दे दी है, हालांकि हकीम ने खुद इस पर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।

​1998 के बाद से टीएमसी का सबसे बड़ा संकट

​संसदीय स्तर पर हुई बगावत से ठीक पहले, पिछले हफ्ते पश्चिम बंगाल विधानसभा में उस वक्त भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी, जब टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से दूरी बना ली थी। इन विधायकों ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा तय किए गए आधिकारिक उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय, पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने का खुला समर्थन किया था।

​राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि इस दोहरी बगावत (संसद और विधानसभा) ने ममता बनर्जी की पार्टी को अब तक के सबसे गंभीर दौर में लाकर खड़ा कर दिया है। वर्ष 1998 में पार्टी की स्थापना के बाद से यह टीएमसी का सबसे बड़ा संगठनात्मक और राजनीतिक संकट माना जा रहा है। इस बगावत ने एक दशक से भी अधिक समय तक बंगाल की सत्ता और राजनीति पर एकछत्र राज करने वाली पार्टी के भीतर की गहरी दरारों को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

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