Saturday, June 13, 2026
राजनीति

फर्जी हस्ताक्षर मामला: टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी से CID की 6 घंटे तक पूछताछ, रविवार को फिर होना होगा पेश

फर्जी हस्ताक्षर मामला: टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी से CID की 6 घंटे तक पूछताछ, रविवार को फिर होना होगा पेश

​कोलकाता:

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के चयन से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में गुरुवार को राज्य की जांच एजेंसी सीआईडी (CID) ने अभिषेक बनर्जी से करीब 6 घंटे तक कड़ी पूछताछ की।

​अभिषेक बनर्जी गुरुवार शाम ठीक 5:50 बजे कोलकाता स्थित सीआईडी मुख्यालय ‘भवानी भवन’ पहुंचे थे और देर रात करीब 11:30 बजे वहां से बाहर निकले। मुख्यालय से बाहर आने के बाद वे सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने उनके आवास पर पहुंचे।

​कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर हुए पेश, मिली अंतरिम राहत

​इससे पहले सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को तीन बार समन जारी किया था, लेकिन उन्होंने बीमारी और कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का हवाला देकर इन्हें टाल दिया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने उन्हें गुरुवार शाम 6 बजे तक सीआईडी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था।

​अदालत से राहत की बात यह रही कि हाई कोर्ट ने उन्हें फिलहाल किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण (राहत) दे दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी। हालांकि, सीआईडी ने उन्हें दोबारा रविवार, 14 जून को पूछताछ के लिए तलब किया है।

​पूछताछ के दौरान CID के 4 मुख्य सवाल

​सूत्रों के अनुसार, 6 घंटे की इस पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी के सामने मुख्य रूप से चार सवाल रखे:

​क्या आपके पास वह मूल (ओरिजिनल) प्रस्ताव दस्तावेज है, जिसकी एक प्रति विधानसभा अध्यक्ष को भेजी गई थी?

​विपक्ष के नेता को चुनने के लिए 6 मई और 19 मई को हुई दो बैठकों में पार्टी के कौन-कौन से पदाधिकारी और नेता मौजूद थे?

​क्या आपको इस बात की जानकारी है कि कुछ विधायकों ने स्पष्ट कहा है कि इस प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर हैं ही नहीं?

​कुछ विधायकों ने ब्लॉक लेटर्स (बड़े अक्षरों) में और दूसरों ने सामान्य लिखावट में हस्ताक्षर क्यों किए हैं?

​सूत्रों का दावा: जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी अधिकारी अभिषेक बनर्जी द्वारा दिए गए जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं नजर आए। पूछताछ के दौरान कुछ मौकों पर अभिषेक बनर्जी के भड़कने की खबरें भी सामने आई हैं।

​क्या है पूरा ‘फर्जी हस्ताक्षर’ मामला?

​यह पूरा विवाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक से जुड़ा है। इस बैठक में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर चर्चा की जानी थी। आरोप है कि इस चयन प्रक्रिया के लिए जो दस्तावेज तैयार किए गए, उन पर कई ऐसे विधायकों के भी हस्ताक्षर कर दिए गए जो उस बैठक में मौजूद ही नहीं थे। विधायकों की गैरमौजूदगी में उनके जाली हस्ताक्षर किए जाने के आरोप सामने आने के बाद से ही राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आया हुआ है।

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