अमेरिका-ईरान के बीच ‘इस्लामाबाद समझौता’ जल्द! जानें परमाणु, होर्मुज और जब्त संपत्ति पर क्या है डील
अमेरिका-ईरान के बीच ‘इस्लामाबाद समझौता’ जल्द! जानें परमाणु, होर्मुज और जब्त संपत्ति पर क्या है डील
वाशिंगटन/तेहरान:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों के अनुसार, अगले दो दिनों के भीतर अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक डील होने जा रही है। ट्रंप ने लगातार तीसरे दिन ईरान पर हमले की अपनी योजना को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ जंग अब खत्म हो चुकी है और दोनों देश एक बेहद मजबूत समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अभी कोई भी समझौता अंतिम रूप से फाइनल नहीं हुआ है।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ‘एक्सियोस’ (Axios) ने इस सीक्रेट वार्ता में शामिल एक वरिष्ठ सूत्र के हवाले से इस बहुप्रतीक्षित समझौते (MoU) के मुख्य बिंदुओं को उजागर किया है। अगर दोनों देश इस पर हस्ताक्षर करते हैं, तो कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार इस ऐतिहासिक डील को “इस्लामाबाद समझौता” नाम दिया जाएगा।
आइए जानते हैं कि इस लीक हुई रिपोर्ट के अनुसार परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य और जब्त संपत्तियों को लेकर क्या शर्तें तय की गई हैं:
1. 60 दिनों का सीजफायर और लेबनान पर भी रोक
रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के तहत सीजफायर (युद्धविराम) को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि इस सीजफायर के दायरे में लेबनान भी शामिल होगा, यानी इस दौरान लेबनान पर भी कोई अमेरिकी या सहयोगी हमला नहीं होगा। इन 60 दिनों की शांति के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर निर्णायक बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी।
2. परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार पर वादा
इस डील के तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ कड़े वादे करेगा।
परमाणु हथियार पर रोक: ईरान यह लिखित गारंटी देगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा।
एनरिच्ड यूरेनियम का समाधान: इस दस्तावेज़ में ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम (संवर्धित यूरेनियम, जिससे परमाणु हथियार बनते हैं) के विवाद को सुलझाने की रूपरेखा दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर सहमत हुए हैं कि ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को देश के भीतर ही कम संवर्धित (लो-एनरिच) स्तर पर बदला जाएगा।
UN की निगरानी: यूरेनियम को कम करने का यह पूरा काम संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी (IAEA) की कड़ी निगरानी में होगा। हालांकि, इस पर अमल तभी होगा जब दूसरा मुख्य समझौता फाइनल हो जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह MoU अमेरिका की सभी परमाणु चिंताओं और मांगों को पूरा करता है।
3. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का खुलना और तेल व्यापार
वैश्विक व्यापार के लिहाज से इस डील का सबसे बड़ा असर समुद्री रास्तों पर पड़ेगा:
तुरंत खुलेगा रास्ता: समझौते पर हस्ताक्षर होते ही होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए तुरंत खोल दिया जाएगा और गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल (टैक्स) नहीं लिया जाएगा।
अमेरिकी नाकेबंदी खत्म: अमेरिका ईरान के खिलाफ की गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटा लेगा और 30 दिनों के भीतर युद्ध से पहले जैसी स्थिति बहाल की जाएगी।
प्रतिबंधों में अस्थायी छूट: होर्मुज खुलते ही ईरान को 60 दिनों के लिए अस्थायी रूप से प्रतिबंधों से छूट मिलेगी, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल बेच सकेगा। यदि ईरान शुरुआत में समझौते का पूरी तरह पालन करता है, तो इस छूट की अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
4. विदेशों में जब्त (Frozen) संपत्ति की किश्तें
ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्ति को लेकर दोनों देशों के बीच रणनीति इस प्रकार है:
ईरान की मांग: ईरान चाहता है कि शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर होते ही उसकी जब्त संपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा उसे तुरंत सौंप दिया जाए।
अमेरिका की शर्त: अमेरिका का रुख है कि यह पैसा एकमुश्त देने के बजाय किश्तों में जारी किया जाएगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान समझौते की शर्तों का कितनी ईमानदारी से पालन कर रहा है।
रिपोर्ट में यह भी अंदेशा जताया गया है कि फ्रोजेन एसेट (जब्त संपत्ति) का यह संवेदनशील मुद्दा किसी गुप्त साइड डील का हिस्सा भी हो सकता है, जिसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
