चारधाम यात्रा: खराब मौसम के कारण 3 हेलीकॉप्टरों की इमरजेंसी लैंडिंग, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल; उड्डयन प्राधिकरण ने दी सफाई
चारधाम यात्रा: खराब मौसम के कारण 3 हेलीकॉप्टरों की इमरजेंसी लैंडिंग, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल; उड्डयन प्राधिकरण ने दी सफाई
उत्तराखंड में चारधाम की यात्रा पूरे जोर-शोर से चल रही है। राज्य सरकार श्रद्धालुओं की यात्रा को सरल, सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, विशेषकर हेली सेवाओं की सुरक्षा को लेकर। पिछले साल हुई कई हेली दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए इस साल तमाम कड़े और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
इसके बावजूद, यात्रा के दौरान मौसम खराब होने की वजह से अब तक तीन हेलीकॉप्टरों की प्रिकॉशनरी (एहतियाती) या इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी है। इस स्थिति ने मौसम की सटीक जानकारी देने वाली सरकारी व्यवस्थाओं और आधुनिक इंतजामों पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब अचानक मौसम बिगड़ने से करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग
इस साल 19 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री और 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। इसके साथ ही केदारघाटी में हेली सेवाओं का संचालन भी शुरू हुआ, लेकिन मौसम लगातार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है:
11 मई की घटना: खराब मौसम और दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण रुद्रप्रयाग में दो हेलीकॉप्टरों की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी।
5 जून की घटना: अचानक बदले मौसम के कारण एक अन्य हेलीकॉप्टर को ऊखीमठ में आपातकालीन स्थिति में लैंड करना पड़ा।
”यह विफलता नहीं, हादसों को रोकने का सुरक्षा कवच है” — CEO आशीष चौहान
इमरजेंसी लैंडिंग के बाद उठ रहे सवालों पर उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आशीष चौहान ने स्थिति को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि इन लैंडिंग्स को तकनीकी रूप से ‘प्रिकॉशनरी लैंडिंग’ (सुरक्षात्मक लैंडिंग) कहा जाता है। उन्होंने कहा:
”पर्वतीय घाटियों (वैली) में मौसम पल-पल में बहुत तेजी से बदलता है। सिरसी, सहस्त्रधारा, बदरीनाथ और केदारनाथ में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) और मौसम वैज्ञानिक लगातार तैनात हैं जो हर मिनट मौसम की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मौसम में अचानक आए बदलाव को देखते हुए ही हेलीकॉप्टरों की प्रिकॉशनरी लैंडिंग कराई गई, जो किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोकने में सबसे बड़ी मददगार साबित हुई है।”
पायलट का विवेक ही होता है अंतिम निर्णय
सीईओ आशीष चौहान ने हेलीकॉप्टर संचालन के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया:
विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR): पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर ‘विजुअल फ्लाइट रूल्स’ के तहत उड़ाए जाते हैं, यानी पायलट सामने दिखने वाली परिस्थितियों के आधार पर ही उड़ान तय करता है।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि: सामने अचानक धुंध या खराब मौसम दिखने पर प्रिकॉशनरी लैंडिंग का निर्णय पूरी तरह पायलट के विवेक पर निर्भर करता है। पायलटों द्वारा समय रहते लिए गए ये निर्णय यात्रियों की सुरक्षित यात्रा के लिए ही हैं।
मौसम की सटीक जानकारी के लिए लगाए जा रहे हैं नए आधुनिक उपकरण
उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक, चारधाम हवाई मार्ग को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपग्रेड करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है:
नए सिस्टम: वर्तमान में एक सिलोमीटर (Ceilometer – बादलों की ऊंचाई नापने वाला यंत्र) और चार स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणालियां (AWOS) लगाने का काम अंतिम चरण में है।
हैंडहेल्ड डिवाइसेज: फील्ड स्टाफ को मौसम की लाइव जानकारी देने वाले हैंडहेल्ड डिवाइस दिए गए हैं।
परमानेंट एटीसी: डीजीसीए (DGCA) के निर्देशों पर बदरीनाथ और केदारनाथ में वर्तमान में अस्थायी एटीसी काम कर रहे हैं, जिन्हें बहुत जल्द स्थायी (परमानेंट) एटीसी में बदल दिया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इन तमाम आधुनिक इंतजामों और कड़े सुरक्षा मानकों के चलते इस बार किसी भी बड़ी अनहोनी को समय रहते टालने में सफलता मिल रही है।
