डिजिटल सुरक्षा पर सरकार का बड़ा कदम: अब देश से बाहर नहीं जाएगा कॉल-मैसेज डेटा, DoT का सख्त नियम लागू
डिजिटल सुरक्षा पर सरकार का बड़ा कदम: अब देश से बाहर नहीं जाएगा कॉल-मैसेज डेटा, DoT का सख्त नियम लागू
भारतीय डिजिटल स्पेस और टेलीकॉम नेटवर्क को साइबर खतरों से सुरक्षित करने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के तहत जारी नए ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय यूज़र्स के कॉल, मैसेज और नेटवर्क से जुड़ा कोई भी डेटा या लॉग देश की सीमाओं से बाहर नहीं भेजा जाएगा और न ही किसी विदेशी सर्वर पर शेयर किया जाएगा।
किन-किन कंपनियों पर लागू होंगे ये कड़े नियम?
दूरसंचार विभाग द्वारा जारी आदेश के दायरे में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी लगभग सभी प्रमुख संस्थाएँ आएंगी। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल टावर कंपनियाँ।
सैटेलाइट अर्थ स्टेशन गेटवे।
क्लाउड-होस्टेड टेलीकॉम नेटवर्क प्रोवाइडर्स।
इंटरनेट एक्सचेंज पॉइंट (IXP) और नेशनल मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) एजेंसियाँ।
इन सभी अधिकृत कंपनियों के लिए डेटा का शत-प्रतिशत लोकल स्टोरेज अनिवार्य कर दिया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कभी भी हो सकता है सरप्राइज ऑडिट
DoT के नए सुरक्षा नियमों के तहत सरकार compliance monitoring (पालन की जाँच) के लिए किसी भी समय कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर और सिस्टम्स का निरीक्षण या ऑडिट कर सकती है। यदि बात राष्ट्रीय सुरक्षा या जनहित से जुड़ी पाई जाती है, तो बिना किसी पूर्व नोटिस के तुरंत कार्रवाई और भौतिक निरीक्षण किया जा सकता है।
TRAI भी स्पैम ऐप्स पर कस रहा है शिकंजा
कॉल मैनेजमेंट और कॉलर ID ऐप्स (जैसे Truecaller) पर यूज़र्स द्वारा दर्ज की जाने वाली स्पैम कॉल्स की रिपोर्टिंग को लेकर TRAI (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण) नियमों को और सख्त करने जा रहा है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत स्पैम रिपोर्टिंग का डेटा रेगुलेटर के साथ साझा करना अनिवार्य किया जाएगा ताकि फर्जी कॉल और साइबर धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
लोकल डेटा सेंटर्स को बढ़ावा और क्लाउड कंपनियों को राहत
डेटा लोकलाइजेशन के इस आदेश से भारत में डेटा सेंटर्स और लोकल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की माँग में तेज़ उछाल आने की संभावना है।
केवल ₹10 लाख एंट्री फीस: सरकार ने ‘क्लाउड-होस्टेड टेलीकॉम नेटवर्क प्रोवाइडर्स’ के लिए एक नई श्रेणी शुरू की है। इसके तहत कंपनियों को केवल ₹10 लाख की वन-टाइम एंट्री फीस देनी होगी, जबकि सालाना ऑथराइजेशन फीस शून्य (₹0) रखी गई है।
स्वीकार नहीं होंगे बहाने: DoT ने साफ कर दिया है कि नेटवर्क रोलआउट में देरी के लिए राइट-ऑफ-वे (RoW) या सरकारी मंजूरियों का हवाला देकर नियमों के उल्लंघन को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
