Tuesday, September 8, 2026
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राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार का निधन, सिनेमा जगत में शोक की लहर

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार का निधन, सिनेमा जगत में शोक की लहर

​कोच्चि: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और प्रख्यात मलयालम अभिनेता सलीम कुमार का कल रात कोच्चि के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। तीन दशकों से अधिक लंबे करियर में करीब 350 फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले सलीम कुमार के निधन से दक्षिण भारतीय सिनेमा जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

​मिमिक्री से की थी करियर की शुरुआत, तीन दशक में किया 350 फिल्मों में काम

​सलीम कुमार ने अपने करियर की शुरुआत एक मिमिक्री कलाकार के रूप में स्टेज और टेलीविजन कॉमेडी शो से की थी, जहां उन्होंने अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का दिल जीता। साल 1996 में उन्होंने सिद्दीक शमीर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘इष्टमानु नूरुवट्टम’ से सिनेमा जगत में कदम रखा। अपने अनोखे अंदाज़ और बेहतरीन अभिनय के दम पर उन्होंने कॉमेडी किरदारों को एक नया आयाम दिया और देखते ही देखते मलयालम सिनेमा के सबसे पसंदीदा अभिनेताओं में शामिल हो गए।

​राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कारों से हुए सम्मानित

​सलीम कुमार सिर्फ कॉमेडी तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने गंभीर और संवेदनशील किरदारों को भी उतनी ही शिद्दत से निभाया।

​राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2010): फिल्म ‘अदामिन्ते मकान अबू’ में उनके भावुक और बेमिसाल अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और राज्य फिल्म पुरस्कार मिला।

​सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: फिल्म ‘अचनुरंगथा वीडु’ के लिए उन्हें केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया।

​सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन: फिल्म ‘अयालुम न्जानुम’ के लिए उन्हें राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

​मलयालम फिल्मों के अलावा उन्होंने तमिल सिनेमा की प्रसिद्ध फिल्मों जैसे ‘अप्पाविन मीसाई’, ‘नेडुंचलाई’ और ‘मरियन’ में भी काम किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने ओडिया फिल्म ‘ऊंगा’ और बंगाली फिल्म ‘मायाबाजार’ में भी अपने अभिनय का जौहर दिखाया।

​मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने जताया गहरा दुख

​सलीम कुमार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने कहा कि सलीम कुमार न सिर्फ एक महान फिल्म स्टार थे, बल्कि उनके लिए एक भाई और परिवार के सदस्य जैसे थे।

​”वे एक असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने साबित किया कि वे सिर्फ कॉमेडी ही नहीं, बल्कि किसी भी तरह के गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदार को पूरी सक्षमता के साथ परदे पर जी सकते हैं। उनका जाना सिनेमा और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”

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