भारत में मॉनसून की एंट्री: केरल तट पर पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान
भारत में मॉनसून की एंट्री: केरल तट पर पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान
देश के कृषि क्षेत्र और आम जनता के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार (4 जून 2026) को औपचारिक ऐलान करते हुए दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल पहुंचने पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है। मौसम विभाग के महानिदेशक (DG) डॉ. एम. महापात्र के मुताबिक, इस साल मॉनसून अपने तय समय (1 जून) से 3 दिन की देरी से केरल तट पर उतरा है।
इससे पहले 15 मई को आईएमडी ने पूर्वानुमान में कहा था कि मॉनसून 26 मई को दस्तक दे सकता है, लेकिन उस अनुमान के मुकाबले यह 10 दिन की देरी से पहुंचा है। गौरतलब है कि पिछले साल (2025) मॉनसून अपने सामान्य समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था और 29 जून तक पूरे देश को कवर कर चुका था।
मॉनसून रेन अलर्ट: अल नीनो के कारण कम बरसेगा पानी
मौसम विभाग ने जून से सितंबर के बीच चार महीनों के इस मॉनसून सीजन के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है।
बारिश का अनुमान: इस सीजन में दीर्घकालिक औसत (LPA) की तुलना में केवल 90 फीसदी तक ही बारिश होने की संभावना है।
अल नीनो का साया: प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रही ‘अल नीनो’ (El Nino) की स्थिति के कारण कम बारिश होने की आशंका 60 फीसदी तक है।
खेती पर असर: मध्य भारत के ‘मॉनसून कोर जोन’ (वह इलाका जहां खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है) में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई और ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
उत्तर भारत और दिल्ली में कब होगी दस्तक?
केरल और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में दस्तक देने के बाद अब मॉनसून धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान सहित पूरे उत्तर भारत और उत्तराखंड-हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों तक पहुंचने में इसे करीब एक महीने का समय लग सकता है।
ताजा चेतावनी:
अगले एक हफ्ते के दौरान केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के तटीय इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तर भारत के राज्यों में मॉनसून आने से पहले ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण अगले दो-तीन दिनों तक प्री-मॉनसून बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग कैसे तय करता है ‘मॉनसून का आगमन’?
हर बारिश को मॉनसून नहीं माना जा सकता। केरल में पिछले कई दिनों से प्री-मॉनसून बारिश हो रही थी, लेकिन मौसम विभाग मॉनसून के आगमन की घोषणा कुछ कड़े वैज्ञानिक पैमानों के पूरा होने पर ही करता है:
नियम: केरल में स्थापित कुल 14 मौसम केंद्रों में से कम से कम 60 फीसदी केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक 2.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश दर्ज होनी चाहिए। इसके साथ ही हवा की गति, दिशा और बादलों के घनत्व (आउटगोइंग लॉन्गवेव रेडिएशन) का पैमाना पूरा होना अनिवार्य है।
क्या होता है मॉनसून का गणित (LPA)?
मौसम विज्ञान के अनुसार, भारत में जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश का 50 वर्षों का दीर्घकालिक औसत (LPA – 1971-2020) 87 सेंटीमीटर (870 मिमी) रहा है। इस साल देश में औसतन 80 सेंटीमीटर वर्षा होने के आसार हैं।
सामान्य से कम मॉनसून: जब बारिश LPA के 90 से 95 फीसदी के बीच हो।
कमजोरी/सूखा: जब बारिश औसत के 90 फीसदी से भी कम रह जाए। (मौसम विभाग ने शुरुआत में इसके 92% रहने की बात कही थी, जिसे अब घटाकर 90% कर दिया गया है)।
इतिहास गवाह है: जब-जब ‘अल नीनो’ की स्थिति बनी है, भारत को सूखे या कम बारिश का सामना करना पड़ा है। इससे पहले साल 2002, 2009, 2015 और 2023 में अल नीनो भारतीय मॉनसून के लिए बड़ी मुसीबत बना था। इस साल केवल पूर्वोत्तर भारत (North-East) के राज्यों में ही सामान्य से ज्यादा बारिश के आसार जताए गए हैं।
