राजनीति

शिक्षा संकट और छात्रों के विरोध पर सोनिया गांधी का केंद्र पर तीखा हमला

शिक्षा संकट और छात्रों के विरोध पर सोनिया गांधी का केंद्र पर तीखा हमला

​नई दिल्ली: ​कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी ने एक लेख के जरिए देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने देशभर में जारी छात्र आंदोलनों का समर्थन करते हुए सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने और शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है।

​’संवाद की जगह बल प्रयोग कर रही सरकार’

​सोनिया गांधी ने लिखा कि पिछले कुछ हफ्तों से देश भर में युवा छात्र परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली के गिरते स्तर के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं—वे सरकार से जवाबदेही और ठोस सुधार चाहते हैं।

​प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई: उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं से बातचीत करने के बजाय सरकार ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जरिए उन पर लाठीचार्ज कराया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

​अतीत की घटनाओं का जिक्र: सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों पर यह ‘बर्बरता’ नई नहीं है। उन्होंने 2020 के CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपसों में हुई पुलिस कार्रवाई और महिला पहलवानों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए सरकार की मानसिकता पर सवाल उठाए।

​शिक्षा बजट में कटौती और NTA पर सवाल

​कांग्रेस नेता ने देश में शिक्षा के बजटीय प्रावधानों और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर भी चिंता जताई:

​निजीकरण को बढ़ावा: सरकार ने स्कूली और उच्च शिक्षा के बजट आवंटन में भारी कटौती की है। सरकारी संस्थानों की उपेक्षा कर निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पढ़ाई आम परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही है।

​पेपर लीक की समस्याएं: NTA जैसी संस्थाओं के अत्यधिक केंद्रीकरण और निजी ठेकेदारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण देश में पेपर लीक एक आम बात बन चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों पेपर लीक की घटनाओं ने होनहार छात्रों का भविष्य अंधकारमय कर दिया है।

​बढ़ती बेरोजगारी और शैक्षणिक गुणवत्ता में गिरावट

​रोजगार और विश्वविद्यालयों की स्थिति पर बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि स्नातक और उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। इसके अलावा, राजनीतिक आधार पर कुलपतियों (VCs) और शिक्षकों की नियुक्तियों ने देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के स्तर को काफी गिरा दिया है।

​उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा करना एक नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक दायित्व है, और विपक्ष युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

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