14 वर्षीय पीड़िता को धमकाने का मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त; दिल्ली पुलिस व यूपी सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, FIR के दिए निर्देश
14 वर्षीय पीड़िता को धमकाने का मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त; दिल्ली पुलिस व यूपी सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, FIR के दिए निर्देश
नई दिल्ली: सीजेपी (CJP) विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में 14 वर्षीय नाबालिग पीड़िता को कथित तौर पर डराने-धमकाने और कानूनी कार्रवाई से रोकने के आरोपों पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि न्याय मांगने वाली किसी नाबालिग पीड़िता या उसके परिवार पर दबाव बनाना या उन्हें प्रताड़ित करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
1. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और FIR का आदेश
अदालत का कड़ा संदेश: मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि किसी नाबालिग को न्याय पाने से रोकने के प्रयासों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने संबंधित एजेंसियों को दोषियों के खिलाफ तुरंत और निष्पक्ष कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
तुरंत कार्रवाई का निर्देश: पीड़िता के वकील द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया कि बच्ची के खिलाफ एक काउंटर-एफआईआर (Counter FIR) दर्ज कराई गई है, जबकि मुख्य आरोपी खुले घूम रहे हैं। हालांकि, अब दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने ने मामले का संज्ञान लिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बिना विलंब के एफआईआर दर्ज कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए।
2. दिल्ली पुलिस व यूपी सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब
चार मुख्य बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है, जिसमें निम्नलिखित जानकारियां शामिल होंगी:
बच्ची के खिलाफ दर्ज काउंटर एफआईआर की वर्तमान स्थिति।
पीड़िता की शिकायत पर की गई पुलिस कार्रवाई की प्रगति।
आरोपी और धमकी देने वाले व्यक्तियों के खिलाफ उठाए गए कदम।
पीड़िता और उसके परिवार को दी गई सुरक्षा का पूरा ब्योरा।
परिवार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: शीर्ष अदालत ने साफ किया कि पीड़िता और उसके परिजनों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। यदि उन्हें डराने या दबाव में लेने का कोई भी प्रयास होता है, तो न्यायालय उस पर बेहद सख्त कदम उठाएगा।
