Thursday, September 10, 2026
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पैक्ड फूड्स पर वार्निंग लेबल (FoPL): सुप्रीम कोर्ट सख्त; बच्चों की सेहत को बताया ‘राष्ट्रीय हित’, 28 सितंबर को अगली सुनवाई  

पैक्ड फूड्स पर वार्निंग लेबल (FoPL): सुप्रीम कोर्ट सख्त; बच्चों की सेहत को बताया ‘राष्ट्रीय हित’, 28 सितंबर को अगली सुनवाई  

​नई दिल्ली: पैक्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स (Packaged & Ultra-Processed Foods) में चीनी (Sugar), नमक (Salt/Sodium) और सैचुरेटेड फैट (Saturated Fat) की अत्यधिक मात्रा को लेकर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इसे गंभीर जनस्वास्थ्य और ‘राष्ट्रीय हित’ का मुद्दा बताते हुए कहा कि वह देश के नागरिकों, विशेष रूप से बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को तय की गई है।

​1. सुप्रीम कोर्ट का रुख और निर्देश

​अदालत का ‘होमवर्क’ व आगामी आदेश: जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने इस विषय पर अपना गहन अध्ययन (Homework) पूरा कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी करेगा, जिसे वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

​राष्ट्रीय हित और सभी पक्षों की भूमिका: पीठ ने टिप्पणी की कि डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के पीछे लिखे पोषक तत्वों को आम उपभोक्ता नहीं पढ़ पाते, इसलिए फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी (Front-of-Pack Warning Label) बेहद जरूरी है। अदालत ने सभी हितधारकों से आदेश का अध्ययन कर 28 सितंबर को अगली सुनवाई में सहयोग करने को कहा है।

​2. FSSAI का प्रस्ताव: रेड हेक्सागोनल चेतावनी लेबल

​भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल कर पैकेजिंग के सामने लाल रंग का षट्कोणीय (Red Hexagonal) चेतावनी चिन्ह लगाने का प्रस्ताव रखा है:

​चार मुख्य चेतावनियाँ: तय सीमा से अधिक पोषक तत्व होने पर “HIGH FAT”, “HIGH SALT”, “HIGH SUGAR” और “HIGHLY SWEETENED BEVERAGE” के स्पष्ट टैग लगाने होंगे।

​चरणबद्ध क्रियान्वयन (Two-Phase Plan):

​पहला चरण: ऐसे उत्पादों पर लागू होगा जिनमें एडेड फैट, एडेड शुगर या नमक में से कम से कम दो या दो से अधिक तत्व सीमा से ज्यादा हैं।

​दूसरा चरण: किसी एक भी पोषक तत्व की अधिक मात्रा वाले उत्पादों को इसके दायरे में लाया जाएगा।

​इन उत्पादों को छूट: शुद्ध घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे एकल-सामग्री (Single-Ingredient) वाले प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को इस लेबलिंग व्यवस्था से छूट दी जाएगी।

​3. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और रंग पर याचिकाकर्ता के सुझाव

​पोषण युक्त बनाम जंक फूड: याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने तर्क दिया कि ‘कुड़कुड़े’ जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पादों को काजू या अंडे जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों के समकक्ष नहीं रखा जा सकता, इसलिए इन पर अधिक सख्त चेतावनियाँ होनी चाहिए।

​रंग में बदलाव का सुझाव: उन्होंने सुझाव दिया कि चूंकि लाल रंग भारत में ‘शाकाहारी/मांसाहारी’ चिह्नों से भी जुड़ा है, इसलिए चेतावनी के लिए लाल के बजाय किसी अन्य विशिष्ट रंग के संकेत पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने इन सुझावों को रिकॉर्ड पर लिया है।

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