Thursday, September 10, 2026
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सालबोनी भूमि घोटाला मामला: TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को CID ने किया गिरफ्तार; सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज

सालबोनी भूमि घोटाला मामला: TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को CID ने किया गिरफ्तार; सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज

​कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित सालबोनी भूमि घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल सीआईडी (CID) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने और गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक की अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद हुई।

​1. सुप्रीम कोर्ट का फैसला और गिरफ्तारी

​भवानी भवन ले जाया गया: सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष अदालत से कानूनी संरक्षण खत्म होते ही सीआईडी की टीम अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची और सुमित रॉय को हिरासत में लिया। उन्हें आगे की पूछताछ के लिए सीआईडी मुख्यालय ‘भवानी भवन’ ले जाया गया।

​अग्रिम जमानत खारिज: इससे पहले 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने रॉय को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए जांच में सहयोग का निर्देश दिया था। हालांकि, जांच एजेंसी की दलीलों को देखने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

​2. क्या है सालबोनी भूमि घोटाला?

​सरकारी जमीन की अवैध बिक्री: मामला पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबोनी इलाके में स्थित सरकारी भूमि के अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है।

​फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल: आरोप है कि सरकारी भूमि को निजी संपत्ति दिखाकर फर्जी दस्तावेजों और काल्पनिक विक्रेताओं (Fake Sellers) के जरिए बेचा गया और इससे भारी अवैध कमाई की गई।

​3. बैंक खातों में करोड़ों का लेनदेन और पक्ष-विपक्ष की दलीलें

​₹15 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन: सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार और सीआईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सुमित रॉय के विभिन्न बैंक खातों में लगभग ₹15 करोड़ जमा होने की जानकारी मिली है, जिसमें एक ही लेनदेन में करीब ₹71 लाख नकद जमा किए गए थे। एजेंसी ने कहा कि इस धन के स्रोत (Source) का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

​बचाव पक्ष का तर्क: सुमित रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बैंक खातों में जमा राशि को पार्टी का ‘सदस्यता शुल्क’ और ‘राजनीतिक चंदा’ बताया और कहा कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

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