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2025 में सड़क हादसों का नया रिकॉर्ड: देश में रोजाना औसतन 502 मौतों का डरावना आंकड़ा

2025 में सड़क हादसों का नया रिकॉर्ड: देश में रोजाना औसतन 502 मौतों का डरावना आंकड़ा

​नई दिल्ली: देश में सड़क सुरक्षा सुधारों के दावों के बीच वर्ष 2025 में सड़क हादसों और मौतों की संख्या ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में 1.8 लाख से अधिक लोगों की जान चली गई, यानी देश में प्रतिदिन औसतन 502 लोगों की मौत हुई। केंद्र सरकार द्वारा आंकड़े जुटाने की शुरुआत के बाद से यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।

​सड़क हादसों का गणित और आंकड़े

​मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 5.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कुल हादसों की संख्या 5.1 लाख के पार पहुंच गई।

​मौतों में शीर्ष राज्य: उत्तर प्रदेश मौतों के मामले में देश में सबसे आगे रहा। यूपी में मौतों का आंकड़ा 2024 के 24,118 से बढ़कर 2025 में 27,550 हो गया। इसके अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु भी सर्वाधिक मौतों वाले राज्यों में शामिल हैं।

​राहत भरी तस्वीर: पंजाब में हादसों में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई, जहां मौतों का आंकड़ा 4,759 से घटकर 3,062 रह गया। वहीं, लक्षद्वीप में लगातार दूसरे साल सड़क हादसे में किसी की मौत दर्ज नहीं हुई।

​राज्यों का विभाजन: कुल 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौतों में बढ़ोतरी हुई, जबकि 17 में कमी आई।

​क्या है eDAR सिस्टम और ब्लैक कॉरिडोर की चिंता?

​सरकार ये आंकड़े eDAR (e-Detailed Accident Report) डिजिटल पोर्टल के जरिए संकलित करती है, जिससे दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कर नीतियां बनाई जाती हैं।

​ब्लैक कॉरिडोर का खतरा: 2023 से 2025 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर 6,358 ब्लैक कॉरिडोर (हादसों वाले संवेदनशील क्षेत्र) चिह्नित किए गए, जहां कुल 37,164 लोगों ने जान गंवाई।

​तमिलनाडु शीर्ष पर: तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 958 ब्लैक कॉरिडोर मिले, जबकि उत्तर प्रदेश (671) दूसरे और कर्नाटक (607) तीसरे स्थान पर रहा। जिलों में तमिलनाडु का विलुप्पुरम (70 ब्लैक कॉरिडोर) सबसे ऊपर रहा।

​विशेषज्ञों का रुख: केवल चालान और जागरूकता काफी नहीं

​विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चालान काटने या जागरूकता अभियानों से आंकड़े कम नहीं होंगे। दुर्घटनाएं रोकने के लिए सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, ब्लैक कॉरिडोर के त्वरित ट्रीटमेंट, बेहतर वाहन सुरक्षा मानकों और त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर जमीनी स्तर पर काम करने की सख्त जरूरत है।

​पश्चिम बंगाल के पूर्ण आंकड़े शामिल होने के बाद इस कुल मौतों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है।

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