राजनीति

उत्तराखंड में चुनावी शंखनाद: राहुल गांधी के 2 दिवसीय दौरे से गरमाई सियासत, कांग्रेस फूंकने जा रही 2027 का बिगुल

उत्तराखंड में चुनावी शंखनाद: राहुल गांधी के 2 दिवसीय दौरे से गरमाई सियासत, कांग्रेस फूंकने जा रही 2027 का बिगुल

​देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में अभी भले ही करीब 7 महीने का समय बाकी हो, लेकिन देवभूमि में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों ने राज्य में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार कार्यक्रमों, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरों और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया 3 दिवसीय दौरे के बाद अब कांग्रेस ने भी अपना सबसे बड़ा दांव खेल दिया है।

​लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी आज (4 जून 2026) से उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर हैं। कांग्रेस इस दौरे को राज्य में साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने ‘चुनावी शंखनाद’ के रूप में देख रही है।

​राहुल गांधी का दो दिवसीय कार्यक्रम: जनसभा से लेकर जिम में वर्कआउट तक

​राहुल गांधी का यह दौरा जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में जोश भरने और विभिन्न वर्गों से सीधे जुड़ने के लिए बेहद रणनीतिक तरीके से तैयार किया गया है:

​4 जून (अल्मोड़ा, पौड़ी और कोटद्वार): राहुल गांधी अपने दौरे के पहले दिन अल्मोड़ा में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे हैं, जहां वे केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों को घेरेंगे। इसके बाद वे पौड़ी जिले में पूर्व सैनिकों के साथ संवाद करेंगे। दिन का एक दिलचस्प पड़ाव कोटद्वार में होगा, जहां राहुल गांधी ‘दीपक कश्यप उर्फ मोहम्मद दीपक’ के जिम में जाकर वर्कआउट करेंगे और वहां की मेंबरशिप भी लेंगे।

​5 जून (देहरादून): दौरे के दूसरे दिन राहुल गांधी राजधानी देहरादून में डेरा डालेंगे। यहां वे कांग्रेस संगठन के तमाम पदाधिकारियों, विभिन्न प्रकोष्ठों, वर्तमान व पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पार्टी के दिग्गजों के साथ मैराथन बैठकें कर चुनावी रणनीति की समीक्षा करेंगे।

​क्यों बेहद अहम है राहुल गांधी का यह दौरा? (रणनीतिक मायने)

​राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, राहुल गांधी का यह दौरा सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक दौरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे तीन बड़े सियासी गणित छिपे हैं:

​सैनिक परिवारों को साधने की कोशिश: उत्तराखंड में ‘सैनिक वोटर’ चुनाव का रुख तय करते हैं। यहां का हर पांचवां व्यक्ति सेना, वायुसेना, नौसेना या अर्धसैनिक बलों में अपनी सेवाएं दे रहा है। पूर्व सैनिकों की भी यहां बहुत बड़ी तादाद है। राहुल गांधी पौड़ी में पूर्व सैनिकों से मिलकर सीधे इन परिवारों तक कांग्रेस का संदेश पहुंचाना चाहते हैं।

​’अग्निवीर’ और स्थानीय मुद्दों पर घेराबंदी: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों का युवा पारंपरिक रूप से सेना में जाना चाहता है। राहुल गांधी इस दौरे में अग्निवीर योजना के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। इसके अलावा महिला सुरक्षा, बढ़ती बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी है।

​गुटबाजी पर लगाम और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा: लगातार दो बार से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस के लिए यह चुनाव ‘करो या मरो’ की स्थिति जैसा है। राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूणी गुटबाजी को खत्म कर सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की है।

​पक्ष-विपक्ष के दावे: संजीवनी या भाजपा को फायदा?

​राहुल गांधी के इस अहम दौरे को लेकर राज्य के सियासी गलियारों और विशेषज्ञों के बीच बयानों का दौर शुरू हो चुका है:

​”कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम करेगा यह दौरा”

“भाजपा की नीतियों के कारण उत्तराखंड विकास की दौड़ में पिछड़ गया है और बेरोजगारी चरम पर है। राहुल गांधी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इस दौरे से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलेगी और सभी नेता एक मंच पर आकर 2027 का चुनाव जीतेंगे।”

— सुरेंद्र सिंह नेगी (पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता)

​”राहुल के आने से कांग्रेस की गुटबाजी और बढ़ेगी”

“राहुल गांधी एक राजनीतिक दल के नेता हैं, चुनाव से पहले दौरे करना उनका अधिकार है। लेकिन इतिहास गवाह है कि राहुल गांधी जब भी उत्तराखंड आते हैं, उसका सीधा फायदा भाजपा को ही मिलता है। उनके आने से कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी और ज्यादा उभरकर सामने आएगी।”

— दिलीप सिंह रावत (भाजपा विधायक, लैंसडाउन)

विश्लेषण: “भाजपा का ग्रासरूट (जमीनी) संगठन बेहद मजबूत है और उसके कार्यकर्ता सक्रिय हैं। कांग्रेस के लिए 2027 का चुनाव अस्तित्व की लड़ाई है। अगर वे इस बार भी हारते हैं, तो संगठन रसातल में चला जाएगा। राहुल गांधी को सबसे पहले पार्टी की गुटबाजी पर लगाम लगानी होगी और ऐसे स्थानीय मुद्दों को पकड़ना होगा जो सीधे जनता के दिल को छुएं।”

​कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की लगातार सक्रियता और अब राहुल गांधी के इस आक्रामक रुख ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड की चुनावी जंग इस बार बेहद दिलचस्प और कांटे की होने वाली है।

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