Wednesday, September 9, 2026
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ईरान का कुवैत पर सुबह-सुबह मिसाइल और ड्रोन हमला, अमेरिकी बेस को बनाया निशाना; सीजफायर के बीच सायरन से गूंजा देश

ईरान का कुवैत पर सुबह-सुबह मिसाइल और ड्रोन हमला, अमेरिकी बेस को बनाया निशाना; सीजफायर के बीच सायरन से गूंजा देश

​पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गई है। सोमवार, 1 जून को सुबह-सुबह ईरान ने कुवैत पर अचानक मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर दिया। कुवैत की सेना ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि देश की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) ने मुस्तैदी दिखाते हुए दुश्मन की ओर से दागी गईं मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। इस हमले के दौरान पूरे कुवैत में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे, जिससे नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई।

​दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए बयान जारी किया है। ईरान का दावा है कि उन्होंने कुवैत में स्थित उन सैन्य ठिकानों (अमेरिकी बेस) को निशाना बनाया है, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी क्षेत्र पर हमला करने के लिए किया जा रहा था।

​कुवैत सेना और सरकारी एजेंसी ने क्या कहा?

​कुवैत की सेना ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट पर देशवासियों को आश्वस्त करते हुए लिखा:

​”हम जनता को सूचित करना चाहते हैं कि जो धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, वे हमारी वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा दुश्मन के इन हमलों को रोकने की जवाबी कार्रवाई का परिणाम हैं।”

​सरकारी समाचार एजेंसी ‘कुना’ (KUNA) के अनुसार, पूरे खाड़ी देश कुवैत में हवाई हमले के सायरन गूंजे हैं। यह सैन्य टकराव बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) लागू है। गौरतलब है कि इससे पहले 28 मई को भी कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए थे, जब बंदर अब्बास में अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया था।

​खाड़ी देशों में बातचीत का दौर जारी, कतर और कुवैत के विदेश मंत्रियों की चर्चा

​इस अचानक हुए हमले के बाद क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी कुना के मुताबिक, कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से फोन पर आपातकालीन बातचीत की है। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र में तेजी से बदल रहे सुरक्षा हालातों और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को मजबूत करने के उपायों पर गहन चर्चा की।

​अमेरिका-इजरायल द्वारा तबाह किए गए 50 अंडरग्राउंड मिसाइल बेस ईरान ने फिर खोले

​सीएनएन (CNN) की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध के बीच ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता को फिर से मजबूत कर लिया है। कई महीनों की लगातार खुदाई और मरम्मत कार्य के बाद ईरान ने अपने अंडरग्राउंड (भूमिगत) मिसाइल ठिकानों के एक बड़े हिस्से तक दोबारा पहुंच हासिल कर ली है।

​हालिया जंग के दौरान अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ईरान के 18 अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था और उनके 69 सुरंग प्रवेश द्वारों (टनल एंट्रेंस) को पूरी तरह बंद कर दिया था। लेकिन ईरानी सेना अब इनमें से 50 प्रवेश द्वारों को फिर से खोलने में कामयाब रही है, जो उसकी सैन्य वापसी को दर्शाता है।

​शांति डील पर डोनाल्ड ट्रंप की नई शर्तें, परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग

​दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर असमंजस बरकरार है। ‘सीबीएस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते में कुछ और कड़े बदलाव करने की मांग रख दी है। इस नए मसौदे के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

​संघर्ष विराम: क्षेत्र में शांति के लिए 60 दिनों तक संघर्ष को पूरी तरह रोकने का प्रस्ताव।

​व्यापारिक मार्ग: वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा सुरक्षित खोलने के उपाय।

​परमाणु कार्यक्रम: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय बातचीत को नए सिरे से शुरू करने की रूपरेखा।

​हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद अभी तक किसी आधिकारिक समझौते की घोषणा नहीं हो सकी है। बीते शुक्रवार को व्हाइट हाउस में इस मुद्दे को लेकर एक हाई-लेवल मीटिंग भी बुलाई गई थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाए। ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से पूरी तरह रोकना ही किसी भी संभावित अमेरिकी शांति समझौते की पहली और मुख्य शर्त होगी।

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