अन्तर्राष्ट्रीय

नेपाल के पीएम बालेन शाह के ‘जमीन कब्जे’ वाले बयान पर विवाद, विदेश मंत्रालय ने दी ‘क्रॉस-बॉर्डर’ अतिक्रमण की सफाई

नेपाल के पीएम बालेन शाह के ‘जमीन कब्जे’ वाले बयान पर विवाद, विदेश मंत्रालय ने दी ‘क्रॉस-बॉर्डर’ अतिक्रमण की सफाई

​नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह द्वारा संसद में भारत और नेपाल की सीमाओं को लेकर दिए गए एक बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री शाह ने टिप्पणी की थी कि भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है और ठीक इसी तरह नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है। इस बयान के बाद दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में मची हलचल को देखते हुए नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस पर आधिकारिक सफाई जारी करनी पड़ी है।

​नेपाल विदेश मंत्रालय की सफाई: यह क्षेत्रीय दावा नहीं, बल्कि ‘नो-मैन्स-लैंड’ का मुद्दा है

​नेपाली मीडिया ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री बालेन शाह का बयान किसी नए क्षेत्रीय दावे (Territorial Claim) को लेकर नहीं था। मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल छेत्री ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री की बातें मुख्य रूप से दोनों देशों के बॉर्डर पर स्थित ‘नो-मैन्स-लैंड’ (दसगजा एरिया) में होने वाले अतिक्रमण और ‘क्रॉस-बॉर्डर कब्जे’ (Border Crossing Occupancy) से जुड़ी थीं। इसका मतलब बॉर्डर के पार दोनों ओर के आम लोगों द्वारा जमीन के इस्तेमाल और वहां खेती करने से है।

​नदी सीमाओं और ‘फिक्स्ड बाउंड्री सिद्धांत’ के कारण पैदा हुए ऐसे हालात

​विदेश मंत्रालय ने इस भौगोलिक स्थिति को तकनीकी रूप से समझाते हुए कहा:

​नदी वाले इलाके: नेपाल और भारत के बीच कई जगहों पर नदी वाले इलाकों में सीमा को ‘फिक्स्ड बाउंड्री सिद्धांत’ (Fixed Boundary Principle) के आधार पर तय किया गया था।

​जमीन का इस्तेमाल: नदियों की बदलती धारा और इस सिद्धांत के कारण कई ऐसे हालात बने जहां एक देश के नागरिक अनजाने में दूसरे देश के अधिकार क्षेत्र में आने वाली जमीन पर रहने लगे या खेती करने लगे।

​तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट: एक टेक्निकल कमेटी के अध्ययन से पता चला है कि नेपाल वर्तमान में जिस जमीन का इस्तेमाल कर रहा है, वह तकनीकी रूप से सीमा के भारतीय हिस्से में आ सकती है। ठीक इसी तरह, भारत के हिस्से वाले लोग जिस जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह नेपाली हिस्से में आ सकती है।

​मंत्रालय ने साफ किया कि प्रधानमंत्री का संसद में दिया गया बयान इसी तकनीकी सच्चाई और व्यावहारिक क्रॉस-बॉर्डर कब्जे के मुद्दे पर आधारित था, जिसे गलत संदर्भ में समझ लिया गया।

​लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी विवाद पर बोले पीएम- डिप्लोमैटिक बातचीत से सुलझेगा मुद्दा

​यह कूटनीतिक सफाई प्रधानमंत्री बालेन शाह की उन टिप्पणियों के बाद आई है, जिसकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना शुरू हो गई थी और कुछ विश्लेषकों ने इसे भारतीय इलाके पर नेपाली दखल की आधिकारिक स्वीकारोक्ति मान लिया था।

​हालांकि, इसी संसदीय सत्र के दौरान अपने रुख को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने यह भी कहा कि नेपाल और भारत को सीमा से जुड़े सभी पुराने और नए मुद्दों पर मिलकर गंभीरता से बात करनी चाहिए। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी से जुड़े त्रिपक्षीय सीमा विवादों को केवल शांतिपूर्ण और राजनयिक (Diplomatic) बातचीत के जरिए ही सुलझाया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *