मारुति सुजुकी इस हफ्ते पेश करेगी भारत की पहली फ्लैक्स-फ्यूल कार, वैगन-आर और फ्रॉन्क्स रेस में सबसे आगे
मारुति सुजुकी इस हफ्ते पेश करेगी भारत की पहली फ्लैक्स-फ्यूल कार, वैगन-आर और फ्रॉन्क्स रेस में सबसे आगे
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पर्यावरण अनुकूल और किफायती ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) इस हफ्ते, यानी 4 जून को भारत की पहली फ्लैक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) पैशेंजर कार को आधिकारिक तौर पर पेश करने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी में दिल्ली में आयोजित होने वाले एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इस नई तकनीक से पर्दा उठाया जाएगा।
वैगन-आर (Wagon-R) या फ्रॉन्क्स (Fronx) पर दांव
हालांकि मारुति सुजुकी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर उस मॉडल के नाम की घोषणा नहीं की है जिसे इस तकनीक के साथ सबसे पहले बाजार में उतारा जाएगा, लेकिन ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार दो प्रमुख मॉडलों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं:
मारुति सुजुकी वैगन-आर फ्लैक्स-फ्यूल (Wagon R Flex Fuel): इस हैचबैक को इस तकनीक का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है। कंपनी पहले ही ‘भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो’ में इसका प्रोटोटाइप मॉडल प्रदर्शित कर चुकी है। यह कार पूरी तरह से घरेलू स्तर पर तैयार की गई है।
मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स फ्लैक्स-फ्यूल (Fronx Flex Fuel): सुजुकी ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ऑटो शो (जापान मोबिलिटी शो) में फ्रॉन्क्स के फ्लैक्स-फ्यूल संस्करण को भी प्रदर्शित किया था, इसलिए इस प्रीमियम क्रॉसओवर मॉडल को भी पहली कार के रूप में पेश किए जाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
100% इथेनॉल (E100) से चलेगी यह कार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पहले ही साफ कर दिया था कि मारुति की यह आगामी कार पूरी तरह से 100 प्रतिशत इथेनॉल (जिसे E100 भी कहा जाता है) पर चलने में सक्षम होगी। फ्लैक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य पेट्रोल कारों से अलग होती हैं, क्योंकि इनके इंजन, फ्यूल पाइप और अन्य पुर्जों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ये पेट्रोल और इथेनॉल के किसी भी मिश्रण (जैसे E20 से लेकर सीधे E100 तक) को आसानी से सहन कर सकें और बिना किसी रुकावट के चल सकें।
महंगे पेट्रोल से मिलेगी राहत, किसानों को होगा फायदा
इस कार के आने से भारतीय ग्राहकों को महंगे पेट्रोल की मार से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इथेनॉल की कीमत पेट्रोल के मुकाबले काफी कम होती है। इसके अलावा, इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का और कृषि अवशेषों से होता है, जिससे देश के किसानों की आय बढ़ेगी। साथ ही, यह तकनीक भारत के भारी-भरकम कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने और पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को घटाने में बेहद मददगार साबित होगी।
