रूस-यूक्रेन युद्ध में रोबोट युग की शुरुआत: यूक्रेन ने मैदान में उतारी ‘रोबोटिक आर्मी’, रूसी सैनिकों में ‘साइलेंट डेथ’ का खौफ
रूस-यूक्रेन युद्ध में रोबोट युग की शुरुआत: यूक्रेन ने मैदान में उतारी ‘रोबोटिक आर्मी’, रूसी सैनिकों में ‘साइलेंट डेथ’ का खौफ
कीव: रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग अब उस मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां इंसान की जगह मशीनें बारूद बरसा रही हैं। चार साल से चल रहे इस विनाशकारी युद्ध में यूक्रेन को सैनिकों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस कमी को कमजोरी बनाने के बजाय यूक्रेन ने युद्ध के मैदान में एक ऐसा खूंखार दांव खेला है, जिसने पूरी बाजी पलट दी है। यूक्रेन अब अपनी इंसानी फौज नहीं, बल्कि ‘रोबोटिक आर्मी’ को जंग के मैदान में उतार चुका है। ये ऐसे सैनिक हैं जिन्हें न भूख लगती है, न प्यास और न ही इन्हें मौत का डर है।
हालत यह है कि अब मोर्चे पर बिना एक भी यूक्रेनी सैनिक को भेजे, रिमोट कंट्रोल और स्क्रीन के जरिए पूरी की पूरी रूसी चौकियों को तबाह किया जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उनकी सेना ने पहली बार सिर्फ रोबोट और ड्रोन की मदद से एक रूसी सैन्य ठिकाने पर कब्जा जमाया है।
बदल गया जमीनी युद्ध का तरीका; कमांडर दूर बैठकर चला रहे ‘मशीनी खेल’
युद्ध का तरीका इस कदर बदल चुका है कि जो कमांडर कभी अग्रिम मोर्चे पर आमने-सामने की खूनी लड़ाई लड़ते थे, वे अब फ्रंटलाइन से कोसों दूर बैठकर इस रोबोटिक खेल को अंजाम दे रहे हैं। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक:
प्लानिंग: एक ही ऑपरेशन में विस्फोटक से लदे कई जमीनी रोबोट्स को रूसी ठिकानों की तरफ रवाना किया जाता है।
निगरानी: आसमान में उड़ रहे टोही (Surveillance) ड्रोन से रूसी सैनिकों की हर हरकत पर लाइव नजर रखी जाती है।
अटैक: कंट्रोल सेंटर में बैठे यूक्रेनी ऑपरेटर्स स्क्रीन पर देखकर इन रोबोट्स को गाइड करते हैं और ब्लास्ट कर देते हैं।
यूक्रेन के लिए यह तकनीक मजबूरी और रणनीति दोनों का हिस्सा बन चुकी है। आबादी के मामले में रूस से काफी छोटे यूक्रेन ने पिछले चार सालों में अपने कई जांबाज सैनिकों को खोया है। सैनिकों की कमी और पश्चिमी देशों से मिलने वाली सैन्य मदद पर मंडराते अनिश्चितता के बादलों के बीच, यूक्रेन ने ड्रोन और रोबोटिक गाड़ियों के उत्पादन को युद्ध स्तर पर बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से अब तक ये मानवरहित सिस्टम 22,000 से ज्यादा मिशनों को अंजाम दे चुके हैं।
रूसी खेमे में खौफ, नाम दिया ‘साइलेंट डेथ’
यूक्रेन के इन जमीनी रोबोट्स ने रूसी खेमे में इस कदर खौफ पैदा कर दिया है कि पकड़े गए रूसी सैनिकों ने इन्हें एक खौफनाक नाम दिया है—’साइलेंट डेथ’ (खामोश मौत)।
रूसी सैनिकों का कहना है कि ये रोबोटिक बम कैरियर इतनी खामोशी से आगे बढ़ते हैं कि जब तक उनकी आवाज सुनाई देती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। अमूमन 10 मीटर की दूरी पर आने के बाद ही इनके आने का पता चलता है, और तब तक पलटवार का समय निकल चुका होता है।
”मैंने कभी सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था। आज महसूस होता है कि अगर यह तकनीक हमारे पास पहले होती, तो मेरे कई साथी आज जिंदा होते। पहले युद्ध में आपकी ट्रेनिंग, अनुशासन और ताकत मायने रखती थी, लेकिन अब सब कुछ तकनीक तय कर रही है।”
— ‘बार’, यूक्रेन के डिप्टी कमांडर (डोनबास क्षेत्र)
हर महीने 35 हजार रूसी सैनिकों को ढेर करने का टारगेट
यूक्रेनी अधिकारियों का लक्ष्य हर महीने करीब 35,000 रूसी सैनिकों को हताहत करने का है और उनका दावा है कि इस साल वे लगातार इस टारगेट को पूरा कर रहे हैं।
यूक्रेन की रणनीति यह है कि अगर रूसी सेना को बड़े पैमाने पर इंसानी नुकसान होगा, तो क्रेमलिन (रूस) को अपने बड़े शहरों और मध्यम वर्ग के परिवारों से जबरन युवाओं को सेना में भर्ती करना पड़ेगा। इससे रूस के अंदर राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ जनता का असंतोष भड़क उठेगा।
ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी ‘GCHQ’ के हालिया अनुमान भी इस भयावह मंजर की तस्दीक करते हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीषण युद्ध में अब तक रूस के करीब 5 लाख सैनिक मारे जा चुके हैं।
