Friday, May 29, 2026
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ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा 2026: दो दिन रहेगी पूर्णिमा तिथि, जानें व्रत और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त व महत्व

ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा 2026: दो दिन रहेगी पूर्णिमा तिथि, जानें व्रत और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त व महत्व

​हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है। प्रत्येक महीने आने वाली पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन जब अधिकमास में पूर्णिमा का संयोग बनता है, तब इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों में अधिकमास की पूर्णिमा को सर्वसिद्धिदायिनी पूर्णिमा बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, व्रत, स्नान और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह विशेष संयोग लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है, इसलिए इस मास में आने वाली पूर्णिमा को अत्यंत फलदायी माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास अधिकमास के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके कारण ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ गया है।

​पूर्णिमा तिथि कब से कब तक रहेगी

​पंचांग के अनुसार इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक रहने वाली है। पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026, शनिवार को प्रातः 11 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ होगी और 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। तिथि दो दिन रहने के कारण व्रत और स्नान-दान की तिथि अलग-अलग मानी जा रही है।

​कब रखा जाएगा अधिकमास पूर्णिमा व्रत

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा व्रत उस दिन रखा जाता है, जिस दिन चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान हो। इसी आधार पर अधिकमास पूर्णिमा व्रत 30 मई 2026, शनिवार को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

​मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव की पूजा करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति को सुख, शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

​स्नान-दान का शुभ समय

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 31 मई 2026, रविवार को उदया तिथि में अधिकमास पूर्णिमा का स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना जाएगा। इस दिन रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जिसे धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

​क्या दान करना माना गया है शुभ

​शास्त्रों में अधिकमास पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और आस्था के साथ दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सौभाग्य बढ़ता है।

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मालपुए का दान करना विशेष फलदायी माना गया है। इसके अलावा जल, अन्न, वस्त्र, गौवंश के लिए चारा तथा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने का भी महत्व बताया गया है। पूर्णिमा के दिन दीपदान करने की परंपरा भी काफी प्राचीन मानी जाती है।

​ऐसी मान्यता है कि अधिकमास पूर्णिमा पर किए गए दान और पुण्य कार्यों से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इससे घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है।

​डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य पंचांग गणनाओं पर आधारित है। इसकी पूर्ण सत्यता और सटीकता की पुष्टि का दावा नहीं किया जाता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले अपनी श्रद्धा और संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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