रक्तदान महादान: भ्रांतियां छोड़ें और बचाएं किसी की जान, जानें कौन कर सकता है रक्तदान
रक्तदान महादान: भ्रांतियां छोड़ें और बचाएं किसी की जान, जानें कौन कर सकता है रक्तदान
रक्तदान को समाज में ‘महादान’ का दर्जा दिया गया है, क्योंकि एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान किसी जरूरतमंद को जिंदगी का नया तोहफा दे सकता है। इसके बावजूद, आज भी समाज में जागरूकता की कमी और विभिन्न गलतफहमियों के कारण कई लोग रक्तदान करने से कतराते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) का मानना है कि यदि लोग इन भ्रांतियों को पीछे छोड़ दें, तो देश में खून की कमी से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
भ्रांतियों को दूर करना है जरूरी
अक्सर लोग यह सोचते हैं कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आ जाती है या स्वास्थ्य पर कोई दीर्घकालिक बुरा असर पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह से खारिज किया है। डॉक्टरों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रक्तदान की प्रक्रिया बेहद सुरक्षित है। हमारा शरीर बहुत ही कम समय में दिए गए रक्त की पूर्ति कर लेता है। इसके अलावा, किसी भी व्यक्ति का रक्त लेने से पहले उसकी गहन चिकित्सा जांच की जाती है, जिससे किसी भी प्रकार के जोखिम की संभावना खत्म हो जाती है।
कौन कर सकता है रक्तदान? (महत्वपूर्ण मापदंड)
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, रक्तदान करने के लिए निम्नलिखित पात्रताएं होनी जरूरी हैं:
आयु सीमा: डोनर की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
हीमोग्लोबिन स्तर: शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम से कम 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर होनी अनिवार्य है।
ब्लड प्रेशर: रक्तदान के समय व्यक्ति का ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) पूरी तरह सामान्य होना चाहिए।
किन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए?
यदि कोई व्यक्ति मौसमी संक्रमण (जैसे सर्दी-खांसी, बुखार), टीबी, कैंसर या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित है, तो उसे रक्तदान करने की अनुमति नहीं दी जाती है।
कितने अंतराल पर करें रक्तदान?
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्तदान की पूरी प्रक्रिया में महज कुछ मिनटों का समय लगता है। शरीर पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। अंतराल की बात करें तो:
पुरुष: हर तीन महीने में एक बार रक्तदान कर सकते हैं।
महिलाएं: हर चार महीने के अंतराल पर सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती हैं।
समय पर रक्त मिलना क्यों है आवश्यक?
देश में हर दिन हजारों मरीजों को दुर्घटनाओं, आपातकालीन सर्जरी, प्रसव (डिलीवरी) और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे में समय पर रक्त की उपलब्धता ही मरीज की जान बचा सकती है।
जनता को इसके प्रति जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिक से अधिक युवाओं और नागरिकों को इस मुहिम से जोड़ने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थानों में नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों (ब्लड डोनेशन कैंप) का आयोजन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि भ्रांतियों से दूर रहें और स्वैच्छिक रक्तदान को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
