धर्म

देवभूमि का चमत्कारी धाम: कोटद्वार के श्री सिद्धबली मंदिर में दर्शन कर अभिभूत हुए सीएम धामी, बताया आस्था और ऊर्जा का केंद्र

देवभूमि का चमत्कारी धाम: कोटद्वार के श्री सिद्धबली मंदिर में दर्शन कर अभिभूत हुए सीएम धामी, बताया आस्था और ऊर्जा का केंद्र

​देहरादून: उत्तराखंड की पावन धरती को ‘देवभूमि’ यूं ही नहीं कहा जाता। यहां के हर पर्वत और कण-कण में देवताओं का वास है। इसी अलौकिक आध्यात्मिक श्रृंखला में पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित ‘श्री सिद्धबली हनुमान जी’ का मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का एक बड़ा केंद्र है। मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दिव्य मंदिर की महिमा पर प्रकाश डालते हुए देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को यहाँ आने का निमंत्रण दिया।

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर मंदिर का एक बेहद खूबसूरत वीडियो साझा किया। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा:

​”पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित प्रसिद्ध सिद्धबली मंदिर भगवान श्री हनुमान जी की आस्था, भक्ति और कृपा का पवित्र संगम है। प्राकृतिक सुंदरता के बीच बना यह मंदिर भक्तों को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। यहां हर दिन दूर-दूर से श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं। अगर आप उत्तराखंड आएं, तो इस पवित्र और दिव्य मंदिर के दर्शन जरूर करें और यहां की आध्यात्मिक शांति का अनुभव करें।”

​खोह नदी के तट पर स्थित है यह पावन 84 सिद्धपीठ

​प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे खोह नदी के तट पर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर देश के प्रमुख 84 सिद्धपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ एक चमत्कारी कल्पवृक्ष भी मौजूद है और जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ बाबा सिद्धबली के दरबार में हाजिरी लगाता है, बजरंगबली उसकी झोली खुशियों से भर देते हैं।

​पौराणिक इतिहास: जब हुआ था गुरु गोरखनाथ और हनुमान जी के बीच युद्ध

​श्री सिद्धबली मंदिर की स्थापना और इसके नाम के पीछे बेहद रोचक पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं:

​बजरंगबली और गुरु गोरखनाथ का युद्ध: मान्यताओं के अनुसार, एक बार कलयुग में भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले गुरु गोरखनाथ अपने गुरु मछेंद्रनाथ को मुक्त कराने के लिए जा रहे थे। इसी स्थान पर वीर हनुमान ने रूप बदलकर उनका रास्ता रोक लिया, जिसके बाद दोनों महाशक्तियों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। जब युद्ध में कोई भी पराजित नहीं हुआ, तब हनुमान जी ने अपने वास्तविक रूप में आकर दर्शन दिए और वचन दिया कि वे इस स्थान पर सदैव एक सजग प्रहरी के रूप में विराजमान रहेंगे।

​कैसे पड़ा ‘सिद्धबली’ नाम: इसी पवित्र स्थान पर कठिन तपस्या करने के बाद ‘सिद्ध बाबा’ नामक एक पूजनीय संत को हनुमान जी के साक्षात दर्शन हुए थे और उन्हें कई सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। इसके बाद, उन्हीं सिद्ध संत (सिद्ध बाबा) और हनुमान जी (बली) के सम्मिलित रूप को यहाँ ‘सिद्धबली’ के नाम से पुकारा जाने लगा।

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