उत्तराखंड

चारधाम यात्रा 2026: पहाड़ों में गहराया पेट्रोल-डीजल का संकट; ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में भड़के श्रद्धालु, हाईवे जाम करने की कोशिश

चारधाम यात्रा 2026: पहाड़ों में गहराया पेट्रोल-डीजल का संकट; ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में भड़के श्रद्धालु, हाईवे जाम करने की कोशिश, जानें SDM का बयान

​जोशीमठ/चमोली: विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इन दिनों अपने चरम पर है, लेकिन बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के मुख्य पड़ाव चमोली जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) स्थित मुख्य पेट्रोल पंप पर ईंधन (तेल) खत्म होने की वजह से यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा।

​नाराज तीर्थयात्रियों और वाहन चालकों ने पंप पर जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग (हाईवे) को जाम करने का प्रयास किया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और काफी मशक्कत के बाद आक्रोशित यात्रियों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया।

​”मैदानी इलाकों से झूठ बोलकर पहाड़ों में भेजा जा रहा आगे” – यात्रियों का आरोप

​सड़कों पर भटके और परेशान यात्रियों ने प्रशासन व तेल कंपनियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। यात्रा मार्ग पर फंसे श्रद्धालुओं का कहना है:

​ऋषिकेश में दिया जा रहा झांसा: “जब हम ऋषिकेश या अन्य मैदानी इलाकों के पेट्रोल पंपों पर तेल भरवाने रुकते हैं, तो हमें यह कहकर आगे बढ़ा दिया जाता है कि पहाड़ों में ईंधन की कोई कमी नहीं है और आगे पर्याप्त तेल मिल रहा है।”

​हर जिले में मिल रहा टालमटोल भरा जवाब: यात्रियों ने बताया कि जैसे-जैसे उनका काफिला आगे बढ़ रहा है, उन्हें अगले जिले का हवाला देकर टाल दिया जाता है। पहले रुद्रप्रयाग में तेल मिलने की बात कही गई, लेकिन वहां भी ईंधन नहीं मिला। इसके बाद चमोली भेजा गया और अब ज्योतिर्मठ पहुंचने पर पंपों पर ‘पेट्रोल उपलब्ध नहीं है’ के पोस्टर लटके मिल रहे हैं।

​ईंधन खत्म होने के कारण सैकड़ों वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए हैं और ज्योतिर्मठ में पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं।

​मैदानी किल्लत का पहाड़ों पर असर, प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल

​स्थानीय नागरिकों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब मैदानी क्षेत्रों में ही तेल की सप्लाई प्रभावित चल रही है, तो कठिन पहाड़ी रास्तों और संकरी सड़कों वाले चमोली-रुद्रप्रयाग जैसे दुर्गम जिलों तक नियमित रूप से तेल टैंकरों का पहुंचना और मुश्किल हो गया है।

​हजारों की संख्या में हर दिन पहुंच रहे वाहनों के बीच अचानक उत्पन्न हुए इस ईंधन संकट ने चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड शासन और जिला प्रशासन द्वारा किए गए दावों व पूर्व तैयारियों पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

​क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी? (राशनिंग के आधार पर मिल रहा तेल)

​इस पूरे विवाद और ईंधन संकट पर प्रशासन ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए यात्रियों से धैर्य रखने की अपील की है।

​जोशीमठ के उपजिलाधिकारी (SDM) चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया:

“क्षेत्र में ईंधन की कोई पूरी तरह से गंभीर किल्लत या ब्लैकआउट जैसी स्थिति नहीं है। हालांकि, बैकअप और सीमित स्टॉक को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वाहनों को एक तय और कम मात्रा (राशनिंग) में ही तेल उपलब्ध कराएं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि पंप पर आने वाले ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को थोड़ा-थोड़ा ईंधन मिल सके और वे सुरक्षित अपने गंतव्य या नजदीकी स्टेशन तक पहुंच सकें। प्रशासन लगातार तेल कंपनियों के संपर्क में है और जल्द ही आपूर्ति को पूरी तरह सुचारू कर दिया जाएगा।”

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