राजनीति

मवेशियों के ‘बर्थ सर्टिफिकेट’ की मांग पर बंगाल में सियासी रार: बीजेपी विधायक रेखा पात्रा के बयान पर टीएमसी का तंज

मवेशियों के ‘बर्थ सर्टिफिकेट’ की मांग पर बंगाल में सियासी रार: बीजेपी विधायक रेखा पात्रा के बयान पर टीएमसी का तंज

​पश्चिम बंगाल की राजनीति में मवेशियों की उम्र और उनके ‘बर्थ सर्टिफिकेट’ (जन्म प्रमाण पत्र) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंगलगंज से नवनिर्वाचित बीजेपी विधायक रेखा पात्रा ने शनिवार को मवेशियों से भरी एक गाड़ी को रोककर उनके जन्म प्रमाण पत्र की मांग कर डाली, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बीजेपी पर तंज कसने का बड़ा मौका मिल गया है।

​यह पूरा मामला हिंगलगंज के लेबुखाली इलाके का है, जहां विधायक रेखा पात्रा ने मवेशियों से लदी एक गाड़ी को बीच रास्ते में रुकवाया। गाड़ी रुकवाने के बाद उन्होंने सभी मवेशियों को नीचे उतरवाया, उन्हें सड़क किनारे एक पेड़ की छांव में बांधा और उनके लिए चारा-पानी का इंतजाम कराया। इसके बाद जो बयान सामने आया, उसने राज्य की सियासी गर्मी बढ़ा दी।

​”14 साल से कम उम्र के मवेशियों को काटा तो खैर नहीं”

​विधायक रेखा पात्रा ने गाड़ी रोकने के पीछे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार के नए नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा:

​मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध मवेशी तस्करों और व्यापारियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई करने के साफ निर्देश दिए हैं।

​सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार, राज्य में 14 साल से कम उम्र के मवेशियों (गायों और गोवंश) को काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

​रेखा पात्रा ने आगे कहा, “अगर कोई भी व्यक्ति गायों को अवैध तरीके से ले जाते हुए पकड़ा जाता है, तो हम उससे गायों के ‘बर्थ सर्टिफिकेट’ दिखाने को कहेंगे ताकि यह साबित हो सके कि वे काटने लायक उम्र की हो चुकी हैं। अगर कोई प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाएगा, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी।”

​टीएमसी का पलटवार: “किसी भी बीजेपी शासित राज्य से गाय का बर्थ सर्टिफिकेट लाकर दिखाएं”

​रेखा पात्रा के इस ‘बर्थ सर्टिफिकेट’ वाले बयान पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है और इसे हास्यास्पद बताया है।

​टीएमसी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा:

“हम माननीय बीजेपी विधायक से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वे देश के किसी भी ‘डबल-इंजन’ (बीजेपी शासित) राज्य से किसी गाय के लिए जारी किया गया ऐसा कोई ‘बर्थ सर्टिफिकेट’ ढूंढकर सामने लाएं। यह हमारे संदर्भ के लिए बहुत मददगार साबित होगा। अगर बीजेपी गाय का ऐसा कोई जन्म प्रमाण पत्र दिखाने में कामयाब हो जाती है, तो हमें यह भी जांचना होगा कि आखिर उन प्रमाण पत्रों को जारी करने वाला महान अधिकारी कौन है।”

​क्या हैं शुभेंदु सरकार के नए नियम?

​पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने मवेशियों और गोवंश के कटान से जुड़े नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। नए नियमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

​प्रमाण पत्र अनिवार्य: अब कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से गाय, बैल या भैंस जैसे गोवंश की हत्या नहीं कर सकता। इसके लिए बकायदा कानूनी सर्टिफिकेट लेना होगा।

​अधिकारियों की मंजूरी: मवेशी को काटने से पहले नगर पालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के सभापति और एक सरकारी पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) से संयुक्त प्रमाण पत्र लेना होगा।

​उम्र और अक्षमता का नियम: इस प्रमाण पत्र में डॉक्टरों को यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित पशु की उम्र 14 साल से अधिक हो चुकी है, या फिर वह किसी गंभीर बीमारी या चोट के कारण स्थायी रूप से अक्षम (अपाहिज) हो चुका है।

​सार्वजनिक कटान पर रोक: सरकार ने साफ किया है कि सर्टिफिकेट मिलने के बाद भी किसी भी पशु को खुली या सार्वजनिक जगह पर नहीं काटा जाएगा। इसके लिए केवल नगर निगम या स्थानीय प्रशासन द्वारा अधिकृत स्लॉटर हाउस (बूचड़खानों) का ही उपयोग किया जा सकेगा।

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