मतलब की बात: वसूली में दादागीरी पर कानूनी लगाम: बैंक लोन या क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट होने पर क्या हैं आपके अधिकार और कानून?
नई दिल्ली, 17 मई 2026: बैंक या NBFC के रिकवरी एजेंट्स द्वारा धमकी, गाली-गलौज, अनुचित घंटी या घर पर बदसलूकी आम शिकायत है। RBI ने ऐसे मामलों पर सख्त नियम बनाए हैं। कर्जदार अपराधी नहीं होता, इसलिए उसकी गरिमा का सम्मान जरूरी है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, रिकवरी कानूनी प्रक्रिया से होनी चाहिए, न कि आतंक से।
RBI गाइडलाइंस और कर्जदार के मुख्य अधिकार
RBI के फेयर प्रैक्टिस कोड और 2026 के नए ड्राफ्ट नियमों (1 जुलाई 2026 से प्रभावी) के अनुसार:
समय की सीमा: रिकवरी एजेंट सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क कर सकते हैं। इससे पहले या बाद में कॉल/विजिट harassment माना जाएगा।
धमकी और बदसलूकी प्रतिबंधित: गाली, धमकी, अपमानजनक भाषा, सोशल मीडिया पर शर्मिंदा करना, परिवार/दोस्तों/कॉलिग्स को परेशान करना पूरी तरह वर्जित है।
पहचान बताना अनिवार्य: एजेंट को बैंक की तरफ से अधिकृत होना चाहिए और अपनी पहचान (नाम, एजेंसी, बैंक का नाम) बतानी होगी।
बैंक की जिम्मेदारी: बैंक रिकवरी एजेंट्स की हरकतों के लिए सीधे जवाबदेह है।
कर्जदार के अन्य अधिकार:
पुनर्भुगतान से पहले उचित नोटिस और बातचीत का अधिकार।
री-स्ट्रक्चरिंग या सेटलमेंट की मांग करने का अधिकार।
प्राइवेसी का अधिकार — बिना वजह परिवार या कार्यालय को सूचित नहीं किया जा सकता (सिवाय गारंटर/को-बॉरोअर के)।
संपत्ति जब्ती केवल SARFAESI एक्ट या कोर्ट आदेश से।
अगर धमकी या बदसलूकी हो तो क्या करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)
सबूत जुटाएं: सभी कॉल रिकॉर्ड करें, मैसेज/वॉट्सएप/ईमेल सेव करें। तारीख, समय, एजेंट का नाम नोट करें।
बैंक को लिखित शिकायत: बैंक के नोडल ऑफिसर/ग्राहक सेवा विभाग को ईमेल या रजिस्टर्ड पोस्ट से शिकायत करें। 7-15 दिनों में जवाब मिलना चाहिए।
RBI बैंकिंग ओम्बड्समैन: अगर बैंक न सुने तो cms.rbi.org.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। मुआवजे की मांग (अधिकतम ₹20 लाख तक) की जा सकती है।
पुलिस में शिकायत: अगर धमकी, मारपीट, या आपकी सुरक्षा को खतरा हो तो तुरंत लोकल पुलिस में FIR दर्ज कराएं (IPC धारा 506 – आपराधिक धमकी, 509 आदि)।
लीगल नोटिस: वकील के जरिए बैंक और एजेंसी को cease & desist नोटिस भेजें।
कंज्यूमर कोर्ट: मानसिक परेशानी और क्षति के लिए मुआवजा मांग सकते हैं।
कानूनी सलाहकारों की राय
कई वकीलों का कहना है कि “लोन न चुकाना सिविल मामला है, क्रिमिनल नहीं (जब तक फ्रॉड न हो)। इसलिए गिरफ्तारी या धमकी का कोई आधार नहीं।” नए RBI नियमों से बैंक अब शिकायत निपटाए बिना रिकवरी आगे नहीं बढ़ा सकते।
महत्वपूर्ण टिप: हमेशा लिखित कम्युनिकेशन रखें। EMI चुकाने में असमर्थ हों तो बैंक से बात करें — कई बार री-शेड्यूलिंग या सेटलमेंट हो जाता है।
अगर आप ऐसी स्थिति में हैं तो तुरंत ऊपर बताए स्टेप्स फॉलो करें। अधिक जानकारी के लिए अपने बैंक की वेबसाइट चेक करें या कानूनी सलाह लें।
नोट: यह सामान्य जानकारी है। व्यक्तिगत मामलों में वकील या RBI हेल्पलाइन से संपर्क करें।
