फ्लेक्स फ्यूल क्रांति की ओर भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार: मारुति, टाटा, हुंडई और टोयोटा की नई गाड़ियां बदलने जा रही हैं खेल
फ्लेक्स फ्यूल क्रांति की ओर भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार: मारुति, टाटा, हुंडई और टोयोटा की नई गाड़ियां बदलने जा रही हैं खेल
भारतीय वाहन बाजार में इन दिनों एक बहुत बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहा है। पेट्रोल और डीजल पर बढ़ती निर्भरता को कम करने और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए भारत सरकार लगातार इथेनॉल मिश्रित ईंधन (Ethanol Blended Fuel) को बढ़ावा दे रही है। देश में ई20 (20% इथेनॉल मिश्रण) ईंधन की सफलता के बाद अब सरकार ई85 और ई100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है।
इसी भविष्य को भांपते हुए देश की दिग्गज कार निर्माता कंपनियों ने भी अपनी कमर कस ली है। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, हुंडई और टोयोटा जैसी कंपनियां अब ऐसी फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) कारों पर काम कर रही हैं, जो 100% तक इथेनॉल मिश्रण पर भी आसानी से दौड़ सकेंगी।
मारुति सुजुकी: फ्रॉन्क्स और वैगन आर का आएगा नया अवतार
देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी अपनी दो सबसे लोकप्रिय कारों को फ्लेक्स फ्यूल अवतार में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है:
मारुति फ्रॉन्क्स (Fronx Flex-Fuel): मारुति ने अंतरराष्ट्रीय वाहन प्रदर्शनी में फ्रॉन्क्स के फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को प्रदर्शित किया है। यह मॉडल विशेष रूप से ई85 ईंधन को सपोर्ट करेगा। इंजन को इथेनॉल के अनुकूल बनाने के लिए इसमें इथेनॉल प्रतिरोधी ईंधन पाइप, उन्नत ईंधन इंजेक्टर, संशोधित ईंधन पंप और विशेष इथेनॉल सेंसर लगाए गए हैं।
मारुति वैगन आर (Wagon R Flex-Fuel): मध्यवर्गीय परिवारों की पसंदीदा कार वैगन आर का भी फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप तैयार हो चुका है। यह कार ई20 से लेकर ई85 तक के मिश्रित ईंधन पर बिना किसी परेशानी के चलने में सक्षम होगी।
टाटा मोटर्स: ‘टाटा पंच’ बनेगी कंपनी की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार
टाटा मोटर्स भी इस रेस में पीछे नहीं है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक अपनी पहली फ्लेक्स फ्यूल कार भारतीय बाजार में उतार देगी।
टाटा पंच (Punch Flex-Fuel): भारत मोबिलिटी एक्सपो में प्रदर्शित पंच के फ्लेक्स फ्यूल मॉडल में 1.2 लीटर का तीन-सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया जाएगा। हालांकि, इसके इंजन नियंत्रण प्रणाली (ECU), ईंधन इंजेक्शन तकनीक और निकास प्रणाली (Exhaust System) में बड़े बदलाव किए गए हैं ताकि यह ई85 ईंधन को आसानी से झेल सके।
भविष्य की योजनाएं: पंच की सफलता के बाद टाटा मोटर्स भविष्य में अपनी लोकप्रिय हैचबैक टियागो (Tiago) और कॉम्पैक्ट सेडान टिगोर (Tigor) के भी फ्लेक्स फ्यूल वेरिएंट बाजार में ला सकती है।
हुंडई: क्रेटा का ई100 मॉडल बाजार में मचाएगा तहलका
दक्षिण कोरियाई कार निर्माता कंपनी हुंडई ने पिछले साल अपनी सबसे लोकप्रिय एसयूवी क्रेटा के फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को शोकेस कर सबको चौंका दिया था।
क्रेटा फ्लेक्स-फ्यूल (Creta Flex-Fuel): इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ई0 (शुद्ध पेट्रोल) से लेकर ई100 (100% शुद्ध इथेनॉल) तक के किसी भी मिश्रण पर चल सकती है।
दमदार परफॉर्मेंस: इसमें 1.0 लीटर का तीन-सिलेंडर टर्बो पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो करीब 118 अश्वशक्ति (hp) की ताकत और 170 न्यूटन मीटर (Nm) का टॉर्क पैदा करता है। इस तकनीक के लिए हुंडई ने गाड़ी की ईंधन प्रणाली और इंजन कंट्रोल यूनिट को पूरी तरह अपग्रेड किया है।
टोयोटा: इनोवा हाइक्रॉस में मिलेगा हाइब्रिड और फ्लेक्स फ्यूल का डबल डोज
जापानी कार निर्माता कंपनी टोयोटा भारतीय बाजार में एक बेहद अनोखा प्रयोग करने जा रही है। कंपनी अपनी प्रीमियम एमपीवी इनोवा हाइक्रॉस में मजबूत हाइब्रिड (Strong Hybrid) तकनीक के साथ फ्लेक्स फ्यूल का तालमेल बिठा रही है।
हाइक्रॉस फ्लेक्स-फ्यूल (Hycross Flex-Fuel): इस गाड़ी में 2.0 लीटर का संशोधित पेट्रोल इंजन मिलेगा, जो ई85 तक के इथेनॉल मिश्रण को सपोर्ट करेगा।
माइलेज और पावर: स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड तकनीक और इथेनॉल के मेल से यह गाड़ी लगभग 184 अश्वशक्ति की भारी-भरकम पावर जेनरेट करेगी। कम प्रदूषण और बेहतरीन माइलेज के कारण यह कार लंबी दूरी की यात्राओं के लिए सबसे किफायती विकल्प बनकर उभरेगी।
क्यों जरूरी है फ्लेक्स फ्यूल तकनीक और क्या होगा फायदा?
भारत सरकार की इस नई नीति और ऑटो कंपनियों के इन प्रयासों से भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार की पूरी तस्वीर बदलने वाली है। इसके कई दूरगामी फायदे होंगे:
सस्ता ईंधन: पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल काफी सस्ता होता है, जिससे आम वाहन मालिकों की जेब पर ईंधन का खर्च काफी कम हो जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा और कम आयात: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इथेनॉल का उत्पादन देश में ही गन्ने और अनाज से होने के कारण कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश का पैसा बचेगा।
पर्यावरण को राहत: इथेनॉल आधारित ईंधन पेट्रोल की तुलना में बहुत कम कार्बन उत्सर्जन करता है, जिससे बड़े शहरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
आने वाले 1-2 वर्षों में भारतीय सड़कों पर फ्लेक्स फ्यूल वाहनों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है, जो देश को एक स्वच्छ और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जाएगा।
