उत्तराखंड

​उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के लिए महामंथन: मानसून से पहले विभागों को ‘अल्टीमेटम’, बजट के लिए देना होगा पुराना हिसाब

उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले शासन और प्रशासन ने कमर कस ली है। आगामी 15 जून से शुरू होने वाले संवेदनशील तीन महीनों के लिए ‘महामंथन’ का दौर शुरू हो गया है। इस बार सरकार ने आपदा प्रबंधन के लिए सख्त रुख अपनाते हुए ‘नो यूटिलाइजेशन, नो बजट’ की नीति लागू कर दी है।

​उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के लिए महामंथन: मानसून से पहले विभागों को ‘अल्टीमेटम’, बजट के लिए देना होगा पुराना हिसाब

​मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में आगामी मानसून सीजन (15 जून से 15 सितंबर) की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि चारधाम यात्रा और मानसून के दोहरे दबाव के बीच लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

​1. बजट के लिए कड़े नियम

​समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कई विभागों ने पिछले आपदा बजट का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (UC) जमा नहीं किया है।

​सख्त निर्देश: मुख्य सचिव ने साफ कहा कि जब तक पुराने खर्च का ब्यौरा (UC) नहीं दिया जाएगा, तब तक नया बजट जारी नहीं होगा।

​पारदर्शिता: आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने स्पष्ट किया कि धन की कमी नहीं है, लेकिन वित्तीय अनुशासन जरूरी है।

​2. चारधाम यात्रा और सड़क सुरक्षा

​मानसून के दौरान चारधाम रूट सबसे अधिक संवेदनशील होता है।

​गड्ढा मुक्त सड़कें: लोक निर्माण विभाग (PWD) को मानसून से पहले सभी सड़कों की मरम्मत और गड्ढा मुक्ति का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

​24×7 अलर्ट: सभी रेखीय विभागों को ‘अलर्ट मोड’ में रहने को कहा गया है ताकि भूस्खलन की स्थिति में मार्ग तुरंत खोले जा सकें।

​3. बुनियादी सुविधाएं और स्वास्थ्य

​बिजली-पानी: विद्युत और पेयजल लाइनों की पूर्व मरम्मत सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि आपदा के समय आपूर्ति लंबे समय तक बाधित न रहे।

​खाद्य आपूर्ति: दुर्गम क्षेत्रों के लिए राशन, गैस, डीजल और पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

​हेली एम्बुलेंस: स्वास्थ्य विभाग को संक्रामक रोगों के प्रति सतर्क रहने और ‘हेली एम्बुलेंस’ को स्टैंडबाय पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

​4. आधुनिक तकनीक और मौसम पूर्वानुमान

​उत्तराखंड में मौसम की सटीक जानकारी के लिए तकनीकी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है:

​डॉप्लर रडार: वर्तमान में राज्य में 3 डॉप्लर रडार काम कर रहे हैं, जबकि 3 और रडार जल्द ही स्थापित किए जाएंगे।

​सेंसर और एप: 525 हाइड्रोमेट सेंसर सक्रिय हैं। सरकार ‘सचेत एप’ और ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ तकनीक के जरिए आमजन तक अलर्ट पहुंचाएगी।

​5. भ्रामक सूचनाओं पर ‘डिजिटल’ प्रहार

​मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया पर आपदा से जुड़ी फेक वीडियो या भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी हरकत करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए।

​6. आगामी बैठकों का दौर

​मुख्य सचिव की इस बैठक के बाद अब आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक और अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद तैयारियों का अंतिम जायजा लेंगे।

​महत्वपूर्ण अवधि: उत्तराखंड में 15 जून से 15 सितंबर तक मानसून सीजन रहता है। सरकार की कोशिश है कि इस वर्ष बेहतर समन्वय के माध्यम से जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम स्तर पर रखा जाए।

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