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प्राइवेट फोटो वायरल होने पर अब 2 घंटे में ‘परमानेंट डिलीट’ होगा कंटेंट! सोशल मीडिया माफिया पर सरकार का नया प्रहार

प्राइवेट फोटो वायरल होने पर अब 2 घंटे में ‘परमानेंट डिलीट’ होगा कंटेंट! सोशल मीडिया माफिया पर सरकार का नया प्रहार

​नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर अश्लीलिटी, डीपफेक और किसी की निजी (प्राइवेट) तस्वीरों को वायरल कर ब्लैकमेल करने वालों के लिए अब जेल के दरवाजे खुल गए हैं। केंद्र सरकार ने IT नियमों (2026 संशोधन) को और सख्त करते हुए ‘डिजिटल स्ट्राइक’ का आदेश जारी किया है। अब अगर किसी की आपत्तिजनक फोटो या वीडियो वायरल होती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उसे महज 2 घंटे के भीतर हटाना होगा।

​आईटी मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि देरी करने पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि प्लेटफॉर्म के अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा भी चलेगा।

​नया नियम: ‘गोल्डन ऑवर’ में कार्रवाई अनिवार्य

​पहले सोशल मीडिया कंपनियों के पास ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई के लिए 24 से 72 घंटे का समय होता था, लेकिन अब नियम बदल गए हैं:

​2 घंटे की डेडलाइन: यदि कोई यूजर अपनी या किसी और की आपत्तिजनक/प्राइवेट फोटो के बारे में शिकायत करता है, तो प्लेटफॉर्म (Facebook, Instagram, X, WhatsApp) को उसे 120 मिनट के भीतर हटाना होगा।

​शिकायत का तरीका: सरकार ने एक ‘इमरजेंसी पोर्टल’ और हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जहां शिकायत दर्ज होते ही संबंधित कंपनी को ऑटोमैटिक अलर्ट चला जाएगा।

​डीपफेक पर भी प्रहार: एआई (AI) के जरिए बनाई गई फर्जी अश्लील तस्वीरों पर भी यही नियम लागू होगा।

​कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

​सरकार ने इसे ‘शिकायत निवारण तंत्र’ के तहत और अधिक पारदर्शी बनाया है:

​AI मॉनिटरिंग: सोशल मीडिया कंपनियां अब ऐसे एल्गोरिदम का इस्तेमाल करेंगी जो वायरल हो रहे कंटेंट की पहचान कर उसे ‘हेशिंग तकनीक’ (Hashing) के जरिए फैलने से रोकेंगे। यानी एक बार फोटो डिलीट हुई, तो उसे दोबारा अपलोड नहीं किया जा सकेगा।

​नोडल ऑफिसर की जवाबदेही: हर कंपनी को भारत में एक ‘इमरजेंसी रिस्पॉन्स ऑफिसर’ तैनात करना होगा जो 24×7 उपलब्ध रहेगा।

​पहचान उजागर करना: पुलिस या कोर्ट के आदेश पर प्लेटफॉर्म को उस व्यक्ति की पहचान (IP एड्रेस और फोन नंबर) उजागर करनी होगी, जिसने सबसे पहले वह फोटो शेयर की थी।

​अगर आपकी फोटो वायरल हो जाए, तो क्या करें?

​सरकार ने नागरिकों के लिए ‘प्रोटोकॉल’ भी जारी किया है:

​स्टेप 1: तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ‘Report’ बटन का इस्तेमाल करें और ‘Non-consensual sexual content’ का विकल्प चुनें।

​स्टेप 2: नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।

​स्टेप 3: 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें और घटना की जानकारी दें।

​कड़ी सजा का प्रावधान

​आईटी मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा है कि महिलाओं और बच्चों की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नए नियमों के उल्लंघन पर:

​दोषी को 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है।

​सोशल मीडिया कंपनियों पर 50 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

​बार-बार गलती करने पर भारत में उस प्लेटफॉर्म को बैन भी किया जा सकता है।

​निष्कर्ष:

इंटरनेट की दुनिया में ‘डिजिटल प्राइवेसी’ अब केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक कानून बन गया है। सरकार की इस सख्ती से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो रिवेंज पोर्न या ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग का शिकार होते रहे हैं। अब जालसाजों का खेल सिर्फ 2 घंटे में खत्म हो जाएगा।

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