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पीएम मोदी की ‘अपील’ से हड़कंप: शेयर बाजार में 1300 अंकों की भारी गिरावट, ज्वेलरी और तेल शेयरों में मची भगदड़

पीएम मोदी की ‘अपील’ से हड़कंप: शेयर बाजार में 1300 अंकों की भारी गिरावट, ज्वेलरी और तेल शेयरों में मची भगदड़

​मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए हफ्ता बहुत बुरा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से सोने की खरीद और ईंधन की खपत में कटौती करने की भावुक अपील के बाद सोमवार, 11 मई 2026 को बाजार बुरी तरह टूट गया। सेंसेक्स और निफ्टी में कोहराम मच गया, जिससे निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।

​क्यों टूटे बाजार के दिग्गज?

​बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह प्रधानमंत्री का वह भाषण रहा, जो उन्होंने रविवार को हैदराबाद की एक रैली में दिया था। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया (यूएस-ईरान) संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए नागरिकों से कुछ कड़े कदम उठाने का आग्रह किया था:

​ज्वेलरी स्टॉक्स में ‘रक्तपात’: पीएम मोदी ने अपील की कि देशहित में लोग कम से कम एक साल तक, खासकर शादियों के लिए सोना न खरीदें। इस एक बयान से ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में 12% तक की गिरावट आई। Titan, Kalyan Jewellers, Senco Gold और PC Jeweller जैसे स्टॉक्स बुरी तरह पिटे।

​तेल और ऊर्जा शेयरों पर दबाव: पीएम ने पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) अपनाने की बात कही। इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएमसी (OMC) कंपनियों के शेयरों में बिकवाली बढ़ गई।

​विदेशी मुद्रा बचाने की मुहिम: पीएम ने विदेशी यात्राएं टालने और खाने के तेल (Edible Oil) की खपत कम करने को कहा ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे।

​आंकड़ों में तबाही: सेंसेक्स और निफ्टी का हाल

​सोमवार को बाजार बंद होने तक स्थिति कुछ इस तरह रही:

​BSE Sensex: 1,312.91 अंक (1.70%) गिरकर 76,015.28 पर बंद हुआ।

​NSE Nifty: 360.30 अंक (1.49%) लुढ़ककर 23,815.85 के स्तर पर आ गया।

​बाजार की चौड़ाई: करीब 3,000 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल 1,300 शेयरों में बढ़त दिखी।

​वैश्विक कारणों ने भी डाला घी में तेल

​केवल पीएम की अपील ही नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों ने भी आग में घी का काम किया:

​यूएस-ईरान तनाव: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करने के बाद ब्रेंट क्रूड $105 प्रति बैरल के पार निकल गया।

​डॉलर बनाम रुपया: डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर (95 प्रति डॉलर) के करीब पहुँच गया है, जिससे विदेशी निवेशक (FIIs) तेजी से पैसा निकाल रहे हैं।

​एक्सपर्ट्स की राय: क्या यह खरीदारी का मौका है?

​बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी की अपील का मकसद देश की अर्थव्यवस्था को ‘करंट अकाउंट डेफिसिट’ (CAD) से बचाना है।

​अल्पकालिक झटका: विश्लेषकों का कहना है कि ज्वेलरी और ऑटो सेक्टर के लिए यह ‘सेंटिमेंटल हिट’ है, जिससे शॉर्ट टर्म में मांग घट सकती है।

​लॉन्ग टर्म नजरिया: विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि निवेशक घबराकर बिकवाली न करें। हालांकि, नए निवेश के लिए बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना ही बेहतर होगा।

​निष्कर्ष:

पीएम मोदी की ‘आर्थिक देशभक्ति’ की अपील ने मिडिल क्लास और निवेशकों को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। जहाँ सरकार विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की कोशिश में है, वहीं दलाल स्ट्रीट इस ‘अपेक्षित मंदी’ के डर से सहमा हुआ है।

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