टेक-ऑटो

अब ई-रिक्शा पर भी लगेगा ‘सेफ्टी’ का ठप्पा: नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, Bharat NCAP के दायरे में आएंगे ‘टुनटुन’

अब ई-रिक्शा पर भी लगेगा ‘सेफ्टी’ का ठप्पा: नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, Bharat NCAP के दायरे में आएंगे ‘टुनटुन’

​नई दिल्ली: सड़कों पर ‘टुनटुन’ और ‘टिर्री’ के नाम से मशहूर ई-रिक्शा अब केवल सस्ती सवारी नहीं, बल्कि सुरक्षित सवारी भी बनेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि सरकार अब ई-रिक्शा के लिए भी Bharat NCAP (New Car Assessment Program) की तर्ज पर सेफ्टी रेटिंग प्रणाली लागू करने जा रही है।

​अब तक यह रेटिंग केवल कारों के लिए होती थी, लेकिन बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए अब ई-रिक्शा को भी क्रैश टेस्ट से गुजरना होगा।

​क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

​देश के छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों की गलियों तक ई-रिक्शा ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ का सबसे बड़ा जरिया बन चुके हैं। लेकिन इनके साथ कुछ गंभीर चुनौतियां भी जुड़ी हैं:

​कमजोर स्ट्रक्चर: अधिकांश ई-रिक्शा हल्के लोहे या टिन से बने होते हैं, जो मामूली टक्कर में भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

​बढ़ते हादसे: आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल लगभग 5 लाख सड़क हादसे होते हैं। ई-रिक्शा के पलटने या उनमें सवार यात्रियों के बाहर गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

​डिजाइन में खामियां: कई ई-रिक्शा में वाइपर, स्पीडोमीटर और सही सिग्नल लाइट्स की कमी होती है।

​कैसे बदलेगी ई-रिक्शा की दुनिया?

​नितिन गडकरी के इस कदम से ई-रिक्शा सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है:

​क्रैश टेस्ट और रेटिंग: कारों की तरह अब ई-रिक्शा को भी 1 से 5 स्टार तक की रेटिंग दी जाएगी। यह रेटिंग बताएगी कि एक्सीडेंट की स्थिति में रिक्शा कितना सुरक्षित है।

​मजबूत बॉडी: रेटिंग पाने के लिए कंपनियों को अब घटिया लोहे की जगह उच्च गुणवत्ता वाले और मजबूत मटेरियल का इस्तेमाल करना होगा।

​स्पीड और स्टेबिलिटी: नई गाइडलाइंस के तहत ई-रिक्शा की अधिकतम गति 25 किमी/घंटा पर सख्ती से सीमित की जाएगी और इनके ‘सेंटर ऑफ ग्रेविटी’ पर ध्यान दिया जाएगा ताकि ये मोड़ पर पलटे नहीं।

​बेहतर सुविधाएं: अब इनमें विंडशील्ड वाइपर, बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम और सुरक्षा के अन्य मानक अनिवार्य होंगे।

​रोजगार और सुरक्षा का संतुलन

​नितिन गडकरी ने जोर देकर कहा कि ई-रिक्शा की सुरक्षा में सुधार से न केवल जान-माल का नुकसान कम होगा, बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जब वाहन सुरक्षित होंगे, तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा और ई-रिक्शा निर्माण की गुणवत्ता में सुधार से भारत वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकेगा।

​निष्कर्ष:

‘मिशन सुरक्षित सड़क’ के तहत लिया गया यह फैसला ई-रिक्शा चालकों और यात्रियों, दोनों के लिए ‘लाइफ सेवर’ साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि कंपनियां इन मानकों को कितनी जल्दी अपनाती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *