ईरान-अमेरिका युद्ध: “ग्रेटर इजरायल” की बड़ी साजिश का हिस्सा? कतर के पूर्व पीएम का चौंकाने वाला खुलासा
ईरान-अमेरिका युद्ध: “ग्रेटर इजरायल” की बड़ी साजिश का हिस्सा? कतर के पूर्व पीएम का चौंकाने वाला खुलासा
दोहा/दुबई: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच का भीषण संघर्ष अब दुनिया के लिए सबसे बड़ा डर बन चुका है। इसी बीच कतर के पूर्व प्रधानमंत्री और अनुभवी राजनयिक शेख हमद बिन जसीम अल थानी ने एक सनसनीखेज विश्लेषण पेश किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह युद्ध कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की “ग्रेटर इजरायल” बनाने की दशकों पुरानी गुप्त योजना का परिणाम है।
नेतन्याहू का ‘भ्रम’ और अमेरिका की ऐतिहासिक चूक
शेख हमद ने ‘अल जजीरा’ को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि नेतन्याहू 1990 के दशक से ही अमेरिका को ईरान के साथ सीधे युद्ध में घसीटने की कोशिश कर रहे थे।
सफल कूटनीतिक जाल: उनके अनुसार, नेतन्याहू वाशिंगटन को यह “भ्रम” बेचने में सफल रहे कि ईरान के खिलाफ युद्ध छोटा, त्वरित और आसान होगा और ईरानी शासन महज कुछ हफ्तों में गिर जाएगा।
सैन्य शक्ति पर निर्भरता: कतर के पूर्व पीएम ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका की असली ताकत बल प्रयोग से बचने में थी, लेकिन वह इस बार इजरायल के बिछाए जाल में फंस गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘डेथ वारंट’
शेख हमद ने चेतावनी दी कि इस युद्ध का सबसे खतरनाक परिणाम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का शस्त्रीकरण और ईरान का उस पर पूर्ण नियंत्रण है।
ईरान की नई रणनीति: उन्होंने बताया कि शुरुआती हमलों को झेलने के बाद ईरान अब इस जलमार्ग को अपनी संप्रभुता का केंद्र मान रहा है।
परमाणु से बड़ा खतरा: उनके अनुसार, होर्मुज की नाकेबंदी ईरानी परमाणु कार्यक्रम की तुलना में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कहीं अधिक तात्कालिक और गंभीर खतरा है।
खाड़ी देशों की आंतरिक फूट और ‘खाड़ी नाटो’ का प्रस्ताव
पूर्व प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों (Gulf Countries) की सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस संकट का सबसे अधिक आर्थिक और ढांचागत नुकसान खाड़ी देशों को उठाना पड़ा है।
सबसे बड़ा खतरा: उन्होंने स्पष्ट किया कि खाड़ी क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा ईरान या इजरायल नहीं, बल्कि देशों के बीच की आंतरिक फूट है।
खाड़ी नाटो (Gulf NATO): उन्होंने इस फूट को खत्म करने के लिए एक ‘खाड़ी नाटो’ के निर्माण का आह्वान किया, जिसकी रीढ़ की हड्डी सऊदी अरब को होना चाहिए। यह संगठन यूरोपीय संघ की तर्ज पर सख्त रक्षा और राजनीतिक नियमों से संचालित होना चाहिए।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा
शेख हमद ने खाड़ी देशों को आगाह किया कि अमेरिका अब अपना ध्यान चीन और एशिया की ओर केंद्रित कर रहा है, इसलिए वे अब अनिश्चित काल तक अमेरिकी सुरक्षा कवच पर निर्भर नहीं रह सकते। उन्होंने सुझाव दिया कि क्षेत्र में शांति के लिए खाड़ी देशों को तुर्की, पाकिस्तान और मिस्र जैसी क्षेत्रीय शक्तियों के साथ नए रणनीतिक गठबंधन बनाने चाहिए और ईरान के साथ एक स्पष्ट, सामूहिक संवाद स्थापित करना चाहिए।
