अन्तर्राष्ट्रीय

​होर्मुज स्ट्रेट संकट: उर्वरकों की कमी से दुनिया पर मंडराया भुखमरी का खतरा

ईरान और अमेरिका के बीच गहराते तनाव ने अब एक भयानक वैश्विक मानवीय संकट की आहट दे दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया चेतावनी के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में जारी इस गतिरोध का असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दुनिया की थाली तक पहुँचने वाला है।

​होर्मुज स्ट्रेट संकट: उर्वरकों की कमी से दुनिया पर मंडराया भुखमरी का खतरा

​पेरिस/न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र टास्क फोर्स के प्रमुख जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से उर्वरकों और कच्चे माल की आवाजाही तुरंत शुरू नहीं हुई, तो दुनिया एक अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी का गवाह बनेगी। उनके अनुसार, इस बाधा के कारण 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग भुखमरी और कुपोषण की कगार पर पहुँच सकते हैं।

​संकट की जड़: क्यों रुकी है सप्लाई?

​होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्ग है, जिसे वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति के कारण बंद कर दिया गया है।

​उर्वरकों का हब: दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों का एक-तिहाई हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।

​कच्चा माल: यूरिया, अमोनिया, सल्फर और फॉस्फेट जैसे कच्चे माल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है।

​बुवाई का मौसम: दा सिल्वा ने आगाह किया है कि अफ्रीकी देशों में बुवाई का सीजन कुछ ही हफ्तों में खत्म हो जाएगा। किसान इंतजार नहीं कर सकते और बिना उर्वरक के पैदावार गिरना तय है।

​राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और UN का प्रयास

​संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा गठित इस विशेष टास्क फोर्स ने एक तंत्र (Mechanism) तैयार किया है जिसके तहत रोजाना औसतन 5 जहाजों को निकालने की अनुमति मांगी जा रही है।

​समर्थन और विरोध: जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा अब तक 100 से अधिक देशों के प्रमुखों से मिल चुके हैं। कई देश इस योजना के पक्ष में हैं, लेकिन अमेरिका, ईरान और प्रमुख उर्वरक उत्पादक खाड़ी देश अभी तक इस पर पूरी तरह सहमत नहीं हुए हैं।

​समय की कमी: UN का दावा है कि यदि राजनीतिक सहमति बन जाए, तो वे 7 दिनों में इस सिस्टम को शुरू कर सकते हैं। हालांकि, स्थिति सामान्य होने में फिर भी 3-4 महीने लगेंगे।

​अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर असर

​विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट का प्रभाव दो चरणों में दिखेगा:

​उर्वरकों की लागत: फिलहाल उर्वरकों की कीमतों में “भारी वृद्धि” दर्ज की गई है।

​खाद्य सुरक्षा: उर्वरक न मिलने से कृषि उत्पादकता घटेगी, जिससे आने वाले महीनों में अनाज की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। पेट्रोल-डीजल की महंगाई के बाद यह आम आदमी के लिए सबसे बड़ी ‘बुरी खबर’ होगी।

​निष्कर्ष: कुछ ही हफ्तों का समय शेष

​”राजनीतिक इच्छाशक्ति” की कमी के कारण करोड़ों लोगों का जीवन दांव पर लगा है। दा सिल्वा के अनुसार, “हमारे पास एक बड़े मानवीय संकट को रोकने के लिए केवल कुछ सप्ताह का समय है।” यदि अब भी शांति का कोई रास्ता नहीं निकला, तो दुनिया को युद्ध के धमाकों से ज्यादा भुखमरी की चीखें डराएंगी।

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