‘PM मोदी का संदेश क्या आर्थिक इमरजेंसी की आहट है?’ — केजरीवाल ने उठाए सवाल
‘PM मोदी का संदेश क्या आर्थिक इमरजेंसी की आहट है?’ — केजरीवाल ने उठाए सवाल
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खाड़ी तनाव के बीच नागरिकों से ईंधन बचत, सोना न खरीदने और अनावश्यक खर्च रोकने की अपील पर आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने इसे “आर्थिक इमरजेंसी की आहट” बताया और सरकार से जवाब मांगा।
केजरीवाल ने सोमवार को X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,
“पीएम मोदी अचानक जनता से बचत करने को कह रहे हैं। क्या यह आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या सरकार को पता है कि देश की अर्थव्यवस्था कहां पहुंच गई है? महंगाई, बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था के बाद अब जनता से बलिदान मांगा जा रहा है।”
केजरीवाल के मुख्य सवाल
क्या सरकार विदेश नीति असफलता के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रही है?
तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ क्यों आम आदमी पर डाला जा रहा है?
क्या यह चुनाव के बाद की सच्चाई है?
केंद्र सरकार से मांग की कि पूर्ण ब्योरा दे कि देश की विदेशी मुद्रा भंडार, व्यापार घाटा और आर्थिक स्थिति क्या है।
पृष्ठभूमि
पीएम मोदी ने हाल ही में राष्ट्र को संबोधित करते हुए सात सूत्री अपील की थी, जिसमें ईंधन की बचत, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल, अनावश्यक विदेश यात्रा टालना और सोने की खरीदारी कम करने जैसे संदेश शामिल थे। सरकार ने इसे “राष्ट्रहित” और “वैश्विक संकट” से निपटने की तैयारी बताया था।
BJP का पलटवार
भाजपा ने केजरीवाल के बयान को “नकारात्मक राजनीति” और “देश की एकता को तोड़ने वाला” बताया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “जब देश चुनौती का सामना कर रहा है तो केजरीवाल जैसे नेता अफवाह फैला रहे हैं। पीएम का संदेश जिम्मेदारी का है, न कि इमरजेंसी का।”
विपक्षी एकता
कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दलों ने भी केजरीवाल का समर्थन किया। राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने पहले ही इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था। अब AAP भी पूरे विपक्ष के साथ जुड़कर संसद और सड़क दोनों मोर्चों पर हमला तेज करने की तैयारी में है।
अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्ट एशिया (खाड़ी क्षेत्र) में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर पड़ रहा है। सरकार इसे “अस्थायी” बता रही है, जबकि विपक्ष इसे “गहरे संकट” की शुरुआत मान रहा है।
अपडेट: केजरीवाल ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने की घोषणा की है। केंद्र सरकार से जवाब की मांग तेज हो गई है। आर्थिक स्थिति और विदेश नीति को लेकर सियासी बहस गरम हो गई है।
देश की अर्थव्यवस्था और जनता की जेब पर पड़ने वाले असर को लेकर नजरें टिकी हुई हैं।
