राजनीति

​नगरपालिका भर्ती घोटाला: ED ने 10 घंटे की पूछताछ के बाद सुजीत बोस को किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में नगरपालिका भर्ती घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में बड़ी प्रगति हुई है। इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट नीचे दी गई है:

​नगरपालिका भर्ती घोटाला: ED ने 10 घंटे की पूछताछ के बाद सुजीत बोस को किया गिरफ्तार

​कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता सुजीत बोस को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी साउथ दमदम नगरपालिका में हुई अवैध भर्तियों के मामले में की गई है। ईडी की टीम ने करीब 10 घंटे की सघन पूछताछ के बाद सोमवार रात यह कार्रवाई की।

​क्या हैं सुजीत बोस पर आरोप?

​ईडी के अनुसार, सुजीत बोस पर नगरपालिका भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं:

​अवैध सिफारिशें: आरोप है कि बोस ने साउथ दमदम म्यूनिसिपैलिटी में विभिन्न पदों के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की अवैध रूप से सिफारिश की थी।

​रिश्वत का लेन-देन: जांच एजेंसी का दावा है कि इन सिफारिशों के बदले उम्मीदवारों से बड़ी मात्रा में पैसे लिए गए थे।

​संदिग्ध संपत्ति: जांच के दौरान ईडी को कई फ्लैट्स और बैंक खातों में भारी कैश डिपॉजिट का पता चला है, जिन्हें कथित तौर पर नौकरी दिलाने के बदले प्राप्त किया गया था।

​कैश मैनेजमेंट और ‘गौतम’ का कनेक्शन

​ईडी सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घोटाले में पैसों के लेन-देन (कैश मैनेजमेंट) का जिम्मा गौतम नाम के एक व्यक्ति के पास था।

​पूर्व में की गई छापेमारी के दौरान गौतम के ठिकानों से करीब 3 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे।

​जांच एजेंसी अब गौतम और सुजीत बोस के बीच के कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

​विधायक रतिन घोष पर भी ईडी का शिकंजा

​इसी मामले में ईडी ने टीएमसी विधायक और पूर्व मंत्री रतिन घोष को भी आज पूछताछ के लिए तलब किया था।

​समन की अनदेखी: रतिन घोष आज ईडी के सामने पेश नहीं हुए।

​सूत्रों का कहना है कि ईडी उन्हें पहले भी कई बार समन भेज चुकी है, लेकिन वह हर बार जांच में शामिल होने से बचते रहे हैं।

​अगली कार्रवाई

​गिरफ्तारी के बाद सुजीत बोस का मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा और कल सुबह ईडी उन्हें विशेष अदालत में पेश करेगी। एजेंसी अदालत से उनकी हिरासत (रिमांड) की मांग करेगी ताकि घोटाले की तह तक जाया जा सके और अन्य सफेदपोशों के नामों का खुलासा हो सके।

​इस गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आने की संभावना है, क्योंकि टीएमसी के एक और बड़े नेता अब केंद्रीय जांच एजेंसी की गिरफ्त में हैं।

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