अन्तर्राष्ट्रीय

​ब्रिक्स बैठक के लिए भारत आएंगे ईरानी उप-विदेश मंत्री: जयशंकर और अराघची की बातचीत के बाद दौरा तय, लावरोव भी होंगे शामिल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी जल्द ही भारत के दौरे पर आ सकते हैं। यह यात्रा नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

​ब्रिक्स बैठक के लिए भारत आएंगे ईरानी उप-विदेश मंत्री: जयशंकर और अराघची की बातचीत के बाद दौरा तय, लावरोव भी होंगे शामिल

​भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने जा रहे ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में ईरान की भागीदारी तय मानी जा रही है। उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी 14-15 मई को नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और ईरान कूटनीतिक समर्थन के लिए ब्रिक्स जैसे वैश्विक मंचों की ओर देख रहा है।

​हाई-लेवल फोन कॉल का असर

​रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दौरा भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई हालिया टेलीफोनिक बातचीत का परिणाम है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा की, जिसके बाद ब्रिक्स बैठक में ईरान की उच्च-स्तरीय भागीदारी की नींव रखी गई।

​रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी आएंगे भारत

​ईरान के साथ-साथ रूस ने भी इस बैठक में अपनी सक्रिय भागीदारी की पुष्टि की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सर्गेई लावरोव 14 से 15 मई तक भारत में रहेंगे।

​लावरोव इस दौरान एस. जयशंकर के साथ एक अलग द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।

​बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक शासन (Global Governance) को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान खोजना होगा।

​ब्रिक्स 2026: क्या है इस बार की थीम?

​भारत इस वर्ष ब्रिक्स का चेयरमैन है। 14-15 मई की यह बैठक सितंबर में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी का मुख्य आधार है। इस वर्ष की थीम है:

​”बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” (Resilience, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण)

​यह थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को दर्शाती है जिसमें मानवता और विकास को प्राथमिकता दी गई है।

​क्यों अहम है यह मंच?

​ब्रिक्स अब दुनिया के 11 प्रमुख देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई) का एक शक्तिशाली समूह बन चुका है।

​ईरान के लिए यह अमेरिका के दबाव के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का मंच है।

​भारत के लिए यह अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करने का अवसर है।

​रूस की प्रवक्ता मारिया जखारोवा के अनुसार, यह बैठक “ग्लोबल साउथ” यानी विकासशील देशों की आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों के लिए अपनी बात रखने का सबसे बड़ा मंच साबित होगी। सितंबर में होने वाले मुख्य शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों की यह बातचीत विश्व राजनीति की नई दिशा तय कर सकती है।

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