अपरा एकादशी पर पंचक का साया: शुभ कार्यों पर भारी पड़ सकती है एक गलती, जानें क्या न करें
अपरा एकादशी पर पंचक का साया: शुभ कार्यों पर भारी पड़ सकती है एक गलती, जानें क्या न करें
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत मोक्ष और पापों के नाश के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस साल ‘अपरा एकादशी’ का विशेष महत्व है, लेकिन इस बार एक बड़ी ज्योतिषीय बाधा सामने आ रही है। इस पावन तिथि के साथ ही ‘पंचक’ की शुरुआत भी हो रही है। मान्यताओं के अनुसार, पंचक की उपस्थिति में कुछ विशेष कार्यों को करना बेहद अशुभ माना जाता है, जिससे व्रत के फल में कमी आ सकती है।
एकादशी और पंचक का संयोग: क्या है खतरा?
अपरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विधान है, वहीं पंचक को पांच नक्षत्रों का एक ऐसा मेल माना जाता है जिसमें नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। ज्योतिषियों का कहना है कि जब एकादशी और पंचक एक साथ हों, तो जातक को अपनी गतिविधियों में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
भूलकर भी न करें ये 5 काम
शास्त्रों के अनुसार, पंचक के दौरान निम्नलिखित कार्यों को करना वर्जित माना गया है:
लकड़ी इकट्ठा करना: इस दौरान घास, लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करना शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि इससे अग्नि का भय बना रहता है।
दक्षिण दिशा की यात्रा: पंचक में दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है। इस दिशा में यात्रा करने से दुर्घटना या भारी नुकसान की आशंका रहती है।
घर की छत डालना: यदि आप घर बनवा रहे हैं, तो पंचक के दौरान लेंटर या छत डालने का काम रोक देना चाहिए। ऐसा करना घर में कलह और अशांति ला सकता है।
बिस्तर या चारपाई बनाना: नए बिस्तर, गद्दे या चारपाई का निर्माण इस समय पूरी तरह वर्जित है।
अंतिम संस्कार के नियम: यदि इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो पंचक दोष दूर करने के लिए विशेष अनुष्ठान (कुश के पुतले साथ जलाना) अनिवार्य होता है।
कैसे करें अपरा एकादशी की पूजा?
पंचक के साये के बावजूद, भगवान विष्णु की भक्ति पर कोई रोक नहीं है। आप इन उपायों से अपना दिन शुभ बना सकते हैं:
विष्णु सहस्रनाम का पाठ: पंचक के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ अत्यंत प्रभावशाली है।
तुलसी पूजन: एकादशी पर तुलसी की सेवा करें, लेकिन ध्यान रहे कि इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
दान का महत्व: पंचक के दोष से बचने के लिए गरीब या ब्राह्मण को पीले अनाज या फलों का दान करें।
विशेष नोट: अपरा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु पंचक के दौरान केवल वर्जित निर्माण कार्यों और यात्रा से बचें, मानसिक जाप और सात्विक दान से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है।
