चीन की ‘तेल चोरी’ का भंडाफोड़: ईरान से अवैध सप्लाई में यूएई (UAE) भी फंसा, अमेरिका ने कसा शिकंजा
चीन की ‘तेल चोरी’ का भंडाफोड़: ईरान से अवैध सप्लाई में यूएई (UAE) भी फंसा, अमेरिका ने कसा शिकंजा
वॉशिंगटन/बीजिंग: दुनिया भर की पाबंदियों को धता बताते हुए चोरी-छिपे ईरान से कच्चा तेल खरीदने के मामले में चीन एक बार फिर रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस बार इस खेल में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कंपनियों की मिलीभगत भी सामने आई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक बड़ा एक्शन लेते हुए उन कंपनियों और जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जो इस ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) का हिस्सा बनकर ईरान का तेल चीन पहुंचा रहे थे।
कैसे खुला चीन और यूएई की मिलीभगत का राज?
हालिया जांच में खुलासा हुआ है कि ईरान का तेल सीधे चीन न भेजकर पहले उसे ‘रि-रूट’ किया जाता था। इस पूरे खेल में यूएई के शिपिंग नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा था:
लेबल बदलकर धोखाधड़ी: ईरान के कच्चे तेल को यूएई या ओमान के बंदरगाहों पर ले जाकर उसका लेबल बदल दिया जाता था, ताकि कागजों पर यह ईरानी नहीं बल्कि किसी अन्य देश का तेल दिखे।
यूएई की कंपनियों पर एक्शन: अमेरिका ने यूएई स्थित उन लॉजिस्टिक और शिपिंग फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जो ईरानी तेल के भुगतान और परिवहन में मदद कर रही थीं।
चीनी ‘टीपॉट’ रिफाइनरी: पकड़े गए तेल का बड़ा हिस्सा चीन की छोटी और निजी ‘टीपॉट’ रिफाइनरियों में जा रहा था, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की परवाह किए बिना सस्ते दाम पर तेल बटोर रही थीं।
अमेरिका की ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’: क्या होगा असर?
मई 2026 में अमेरिका ने इस नेटवर्क पर ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ (Economic Fury) के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य ईरान के सैन्य बजट और उसके प्रॉक्सी संगठनों को मिलने वाली फंडिंग को रोकना है।
जहाजों पर बैन: दर्जनों ऐसे तेल टैंकरों (Shadow Fleet) की पहचान की गई है, जो अपनी लोकेशन छिपाने के लिए समुद्र में अपना ‘ट्रांसपोंडर’ बंद कर देते थे।
करोड़ों डॉलर का ट्रांजेक्शन: रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई के जरिए ईरान ने चीन को तेल बेचकर अरबों डॉलर कमाए हैं, जिसका इस्तेमाल ईरान अपनी हथियार प्रणालियों और मिसाइल प्रोग्राम को मजबूत करने में कर रहा था।
चीन को चेतावनी: अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश या कंपनी ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों को छिपाएगी, उसे वैश्विक बैंकिंग सिस्टम (SWIFT) से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है।
चीन की चुप्पी और बाजार में हलचल
इस खुलासे के बाद चीन ने आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन जानकारों का कहना है कि चीन अपनी ‘ऊर्जा सुरक्षा’ (Energy Security) के नाम पर ईरान से सस्ता तेल खरीदना जारी रखना चाहता है। हालांकि, अब यूएई और ओमान जैसे मिडिल-ईस्ट देशों पर दबाव बढ़ने से चीन के लिए यह ‘सस्ता सौदा’ अब महंगा पड़ सकता है।
खबर के मुख्य बिंदु:
ईरान के तेल को यूएई के रास्ते चीन भेजने का ‘गुप्त नेटवर्क’ पकड़ा गया।
अमेरिका ने यूएई और हांगकांग की दर्जनों कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए।
ईरानी तेल की सप्लाई रोकने के लिए ‘शैडो फ्लीट’ पर कड़ी निगरानी शुरू।
