Tuesday, June 30, 2026
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NEET पेपर लीक पर सरकार का ‘ब्रह्मास्त्र’: दोषियों को 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान

NEET पेपर लीक पर सरकार का ‘ब्रह्मास्त्र’: दोषियों को 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान

​नई दिल्ली: मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) में पेपर लीक और धांधली को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। देशभर में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं और छात्रों के आक्रोश को देखते हुए सरकार ने नए कानून के तहत कड़े दंड का प्रावधान लागू कर दिया है। अब पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या गिरोह को अपनी पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे गुजारनी पड़ सकती है।

​सख्त कानून: अब खैर नहीं दोषियों की

​केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम’ के तहत पेपर लीक माफियाओं पर लगाम कसने के लिए निम्नलिखित कड़े प्रावधान किए गए हैं:

​भारी जुर्माना: पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले संगठित अपराध गिरोहों पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

​लंबी जेल: दोषियों को न्यूनतम 5 साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक की कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।

​संपत्ति की कुर्की: यदि कोई संस्थान या कोचिंग सेंटर इस धांधली में शामिल पाया जाता है, तो उसकी संपत्ति कुर्क की जाएगी और परीक्षा का पूरा खर्च भी उसी संस्थान से वसूला जाएगा।

​छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पड़ेगा महंगा

​हाल के वर्षों में नीट परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़कों तक काफी हंगामा देखने को मिला है। सरकार का यह नया कानून विशेष रूप से उन ‘सॉल्वर गैंग’ और प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े लोगों को टारगेट करता है जो मिलीभगत कर पेपर लीक कराते हैं।

​बिना जमानत की सजा: नए नियमों के तहत कई अपराधों को गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है।

​पारदर्शिता पर जोर: सरकार का मानना है कि इस कानून के डर से भविष्य में मेधावी छात्रों के हक पर डाका डालना नामुमकिन हो जाएगा।

​कब से लागू होंगे नियम?

​नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित होने वाली आगामी परीक्षाओं से ही इन नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की शुचिता से समझौता करने वाले किसी भी अधिकारी या बाहरी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

​कानून की मुख्य बातें:

​संगठित अपराध की स्थिति में 10 साल की सजा।

​न्यूनतम 1 करोड़ रुपये का आर्थिक दंड।

​परीक्षा केंद्रों और सर्विस प्रोवाइडर्स की जवाबदेही तय।

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