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​’न लॉकडाउन लगेगा, न तेल की किल्लत होगी’: हरदीप सिंह पुरी ने अफवाहों पर लगाया लगाम, बताया भारत का ‘एनर्जी बैकअप’

मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच देश के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारतीयों को बड़ी राहत दी है। अफवाहों का बाजार गर्म था कि युद्ध के चलते तेल की कमी होगी या लॉकडाउन लग सकता है, लेकिन CII समिट में मंत्री ने इन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया।

​’न लॉकडाउन लगेगा, न तेल की किल्लत होगी’: हरदीप सिंह पुरी ने अफवाहों पर लगाया लगाम, बताया भारत का ‘एनर्जी बैकअप’

​नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ‘अभय कवच’ मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने संकट को अवसर में बदलते हुए अपने भंडार को और मजबूत किया है।

​1. लॉकडाउन की अटकलें सिर्फ ‘मिथक’

​सोशल मीडिया पर चल रही लॉकडाउन की खबरों को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा, “कल कोई लॉकडाउन नहीं लगने जा रहा है। ये सब सिर्फ अफवाहें हैं और इनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। हमें ऐसी भ्रामक चर्चाओं को खत्म करने की जरूरत है।”

​2. भारत के पास कितना है तेल और गैस का भंडार?

​मंत्री पुरी ने देश के ऊर्जा भंडार का ब्यौरा पेश किया, जो यह सुनिश्चित करता है कि सप्लाई चैन पूरी तरह सुरक्षित है:

​कच्चा तेल (Crude Oil): 60 दिनों का स्टॉक।

​LNG (तरल प्राकृतिक गैस): 60 दिनों का बैकअप।

​LPG (रसोई गैस): 45 दिनों का स्टॉक।

​कुल क्षमता: अंतरराष्ट्रीय मानकों (90 दिन) के मुकाबले भारत के पास फिलहाल 76 दिनों का भंडार है, जिसे और बढ़ाने पर काम जारी है।

​3. LPG उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी

​हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई पर निर्भरता और युद्ध के जोखिम को देखते हुए भारत ने घरेलू स्तर पर कमर कस ली है। रसोई गैस का उत्पादन 36,000 MT से बढ़ाकर 54,000 MT कर दिया गया है, ताकि देश के किसी भी कोने में गैस की कमी न हो।

​4. कंपनियों को भारी घाटा, पर जनता को राहत

​मंत्री ने खुलासा किया कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में पिछले 4 साल से पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं।

​दैनिक घाटा: तेल कंपनियां रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं।

​कुल अंडर-रिकवरी: कंपनियों का घाटा लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

​हरदीप पुरी ने कहा, “अर्थव्यवस्था पर दबाव के बावजूद हमने अन्य देशों की तरह इसका बोझ आम जनता की जेब पर नहीं डाला है।”

​5. जीवनशैली में बदलाव का सुझाव

​प्रधानमंत्री मोदी के विजन का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि युद्ध के असर से हम पूरी तरह अछूते नहीं रह सकते। यदि स्थिति लंबे समय तक तनावपूर्ण रहती है, तो हमें अपनी जीवनशैली (Lifestyle Changes) में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं।

​निष्कर्ष: तमाम चुनौतियों के बावजूद, भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। सरकार के इस बयान ने तेल की कीमतों में भारी उछाल या किल्लत की आशंकाओं को फिलहाल शांत कर दिया है।

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