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समुद्र में ‘डेथ वायरस’ का तांडव: क्रूज शिप पर हंता वायरस से 3 मौतें, क्या भारत में भी है बड़ा खतरा?

समुद्र में ‘डेथ वायरस’ का तांडव: क्रूज शिप पर हंता वायरस से 3 मौतें, क्या भारत में भी है बड़ा खतरा?

​नई दिल्ली/कैनरी आइलैंड्स: जहां दुनिया अभी कोरोना के जख्मों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है, वहीं दक्षिण अटलांटिक महासागर से आई एक खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। एक डच क्रूज शिप पर ‘हंता वायरस’ (Hantavirus) के फैलने से हड़कंप मच गया है। अब तक इस वायरस की चपेट में आने से 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है।

​क्रूज शिप पर मची चीख-पुकार

​रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमण की शुरुआत अर्जेंटीना से हुई थी, जहां से यात्री क्रूज पर सवार हुए थे।

​एंडिस स्ट्रेन का कहर: वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि यह हंता वायरस का ‘एंडिस’ (Andes) स्ट्रेन है। यह स्ट्रेन बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह दुर्लभ स्थितियों में एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है।

​शिप को किया गया क्वारंटीन: वर्तमान में क्रूज को स्पेन के कैनरी आइलैंड्स के पास रोक दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं और संक्रमित यात्रियों को आइसोलेशन में रखा गया है।

​क्या भारत तक पहुंच सकता है यह वायरस?

​भारत में इस खबर के बाद चिंताएं बढ़ गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने फिलहाल राहत की बात कही है:

​कोई सामुदायिक प्रसार नहीं: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, भारत में हंता वायरस का कोई सक्रिय सामुदायिक प्रसार नहीं है।

​भारतीय चालक दल (Crew) की स्थिति: शिप पर मौजूद दो भारतीय क्रू मेंबर्स को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार उन्हें निगरानी में रखा गया है और फिलहाल खतरे जैसी कोई बात नहीं है।

​फैलने का तरीका: हंता वायरस कोरोना की तरह हवा से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से चूहों के मल-मूत्र, लार या उनके काटने से फैलता है। इसलिए इसके वैश्विक महामारी बनने की संभावना कम है।

​हंता वायरस के लक्षण: इन बातों का रखें ध्यान

​डॉक्टरों के अनुसार, हंता वायरस के लक्षण दिखने में 1 से 8 सप्ताह का समय लग सकता है:

​तेज बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में असहनीय दर्द।

​पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे उल्टी और दस्त।

​संक्रमण बढ़ने पर फेफड़ों में पानी भरना (HPS) और सांस लेने में गंभीर तकलीफ।

​सावधानी ही बचाव है

​विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस चूहों के जरिए फैलता है, इसलिए घर और आसपास की साफ-सफाई सबसे ज्यादा जरूरी है। क्रूज शिप पर हुई ये मौतें इस बात की चेतावनी हैं कि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

​निष्कर्ष: फिलहाल भारत के लिए घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर उन देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग तेज कर दी गई है जहां यह वायरस पाया गया है।

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