बीजिंग वार्ता: चीन ने ईरान-अमेरिका युद्ध में ‘पूर्ण युद्धविराम’ की मांग की; इजरायली हमले को बताया ‘अवैध’
चीन और ईरान के बीच बीजिंग में हुई उच्च स्तरीय बैठक ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच चीनी विदेश मंत्री वांग यी और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची की यह मुलाकात शांति प्रयासों के लिए निर्णायक मानी जा रही है।
बीजिंग वार्ता: चीन ने ईरान-अमेरिका युद्ध में ‘पूर्ण युद्धविराम’ की मांग की; इजरायली हमले को बताया ‘अवैध’
बीजिंग: बुधवार, 6 मई 2026 को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमलों के बाद अराघची की यह पहली चीन यात्रा है। इस बैठक में चीन ने स्पष्ट किया कि वह क्षेत्र में अब और “शत्रुता” बर्दाश्त नहीं करेगा।
पूर्ण युद्धविराम: अस्थायी समाधान मंजूर नहीं
वांग यी ने बैठक के दौरान कहा कि पिछले दो महीनों से चल रहे युद्ध ने न केवल ईरानी लोगों को भारी क्षति पहुँचाई है, बल्कि वैश्विक शांति को भी खतरे में डाल दिया है।
चीन का स्टैंड: वांग यी ने कहा, “हमारा मानना है कि पूर्ण युद्धविराम की तत्काल आवश्यकता है। संघर्ष को फिर से शुरू करना अब स्वीकार्य नहीं है।” * संवाद पर जोर: चीन ने दोनों पक्षों (ईरान और अमेरिका-इजरायल) से अपील की है कि वे युद्ध के बजाय वार्ता और संवाद के रास्ते पर अडिग रहें।
इजरायल और अमेरिका के हमले पर कड़ा रुख
चीन ने एक बार फिर ईरान का पक्ष लेते हुए तेहरान पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की:
हमले को बताया अवैध: वांग यी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान की संप्रभुता पर किया गया हमला ‘अवैध’ है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।
ईरान का बचाव: चीन ने ईरान के उस संकल्प का भी समर्थन किया जिसमें उसने शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग की बात कही है और परमाणु हथियार न बनाने का वादा दोहराया है।
रणनीतिक महत्व: हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वे ईरान के साथ एक समझौते के करीब हैं।
वैश्विक ऊर्जा संकट: 28 फरवरी से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) लगभग बंद है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा रुक गया है। चीन, जो ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, इस मार्ग को जल्द से जल्द खुलवाना चाहता है।
हथियारों की सप्लाई के आरोप: जहाँ अमेरिका चीन पर ईरान को गुप्त रूप से हथियार देने का आरोप लगाता रहा है, वहीं चीन ने खुद को एक ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश किया है जो तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।
ईरान की अपेक्षाएं
अब्बास अराघची ने चीन को अपना “करीबी और भरोसेमंद दोस्त” बताया। उन्होंने कहा कि ईरान केवल एक ‘न्यायपूर्ण और व्यापक समझौते’ को ही स्वीकार करेगा। अराघची की बीजिंग यात्रा उनके पाकिस्तान, ओमान और रूस के दौरे के बाद हुई है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के लिए समर्थन जुटाना है।
निष्कर्ष: चीन की यह पहल अमेरिका और ईरान के बीच चल रही ‘बैक-चैनल’ वार्ताओं को नई ऊर्जा दे सकती है। अब सबकी नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं, जब ईरान द्वारा अमेरिका के प्रस्तावित ‘शांति मसौदे’ (MOU) पर जवाब दिए जाने की उम्मीद है।
