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​वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा: कैबिनेट का बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक (5 मई 2026) में एक बड़ा निर्णय लिया गया है। इस बैठक में वंदे मातरम (राष्ट्रीय गीत) को कानूनी रूप से जन गण मन (राष्ट्रगान) के समान दर्जा देने और इसके अपमान पर सजा के प्रावधान वाले संशोधन को मंजूरी दे दी गई है।

​वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा: कैबिनेट का बड़ा फैसला

​केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (The Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के बाद अब वंदे मातरम का अपमान करना या इसके गायन में बाधा डालना एक दंडनीय अपराध होगा।

​अधिनियम में बदलाव और सजा का प्रावधान

​समान दर्जा: अब तक केवल राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर सजा का प्रावधान था। नए संशोधन के बाद वंदे मातरम को भी इसी कानूनी दायरे में शामिल किया गया है।

​सजा की अवधि: अधिनियम की धारा-3 में संशोधन किया जाएगा। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम के गायन में बाधा डालता है या अशांति फैलाता है, तो उसे:

​3 साल तक की कैद, या

​जुर्माना, या

​दोनों से दंडित किया जा सकता है।

​पुनरावृत्ति पर कड़ाई: दूसरी बार या बार-बार अपराध करने पर कम से कम एक साल की जेल का अनिवार्य प्रावधान प्रस्तावित है।

​वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ का अवसर

​यह फैसला ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश वर्तमान में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है।

​बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

​सरकार के इस कदम को बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को कानूनी सुरक्षा देने के रूप में देखा जा रहा है।

​पृष्ठभूमि और चुनावी संदर्भ

​गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश: इससे पहले फरवरी 2026 में गृह मंत्रालय ने निर्देश दिए थे कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का गायन किया जाए और इसे राष्ट्रगान से पहले प्राथमिकता दी जाए। हालांकि, वे निर्देश केवल ‘परामर्श’ (Advisory) थे, जिन्हें अब कानूनी शक्ति दी जा रही है।

​बंगाल चुनाव का प्रभाव: पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भाजपा ने वंदे मातरम को ‘बंगाली अस्मिता’ और राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाया था। राज्य में भाजपा की शानदार जीत के तुरंत बाद लिया गया यह फैसला राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत प्रभावी माना जा रहा है।

​आगे की प्रक्रिया

​कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा। संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद यह आधिकारिक रूप से कानून का हिस्सा बन जाएगा।

​विशेष तथ्य: अब तक राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो अंतरों को ही आधिकारिक रूप से गाया जाता था, लेकिन नई गाइडलाइंस और प्रस्तावित कानून के बाद इसके पूरे छह अंतरों के गायन और उनके सम्मान को लेकर प्रोटोकॉल कड़ा हो जाएगा।

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