पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भवानीपुर में ममता बनर्जी की करारी हार, सुवेंदु अधिकारी ने फिर चटाई धूल
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भवानीपुर में ममता बनर्जी की करारी हार, सुवेंदु अधिकारी ने फिर चटाई धूल
बड़ा उलटफेर: टीएमसी का अभेद्य गढ़ ढहा, 15 हजार से अधिक वोटों से जीते सुवेंदु; काउंटिंग सेंटर पर हाई वोल्टेज ड्रामा
कोलकाता/भवानीपुर। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर पर मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अपने ही पूर्व सहयोगी और बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के हाथों शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराकर भवानीपुर के चुनावी इतिहास को बदल दिया है।
कांटे की टक्कर और तनावपूर्ण माहौल
भवानीपुर सीट पर वोटों की गिनती के दौरान दिन भर उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा। 20 राउंड की लंबी काउंटिंग के बाद अंतिम आंकड़े सामने आए:
सुवेंदु अधिकारी (बीजेपी): 73,463 वोट
ममता बनर्जी (टीएमसी): 58,349 वोट
नतीजों के स्पष्ट होते ही भवानीपुर के काउंटिंग सेंटर के बाहर भारी तनाव देखा गया। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब केंद्र पर पहुंचीं, तो उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए। टीएमसी समर्थकों ने भी केंद्र के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर भी सुवेंदु के नाम
यह दूसरी बार है जब सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके घर में मात दी है। इससे पहले 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता को हराया था, जिसके बाद ममता ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर अपनी कुर्सी बचाई थी। लेकिन इस बार सुवेंदु ने भवानीपुर में ही चुनौती दी और टीएमसी के इस गढ़ को भेदने में सफलता पाई।
हार के प्रमुख राजनीतिक मायने
गढ़ का पतन: भवानीपुर लंबे समय से टीएमसी और ममता बनर्जी का व्यक्तिगत सुरक्षित क्षेत्र माना जाता रहा है। यहाँ हारना टीएमसी के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है।
सुवेंदु का बढ़ता कद: अधिकारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं।
सत्ता की बागडोर पर सवाल: 2021 की तरह इस बार भी मुख्यमंत्री को अपनी ही सीट पर हार का सामना करना पड़ा है, जो राज्य की भावी राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।
सीट का इतिहास और वर्तमान
1951 में अस्तित्व में आई भवानीपुर सीट पर कभी कांग्रेस और वामपंथियों का असर था, लेकिन 2011 के बाद से यह टीएमसी का अजेय किला बन गई थी। 4 मई 2026 की शाम को आए इन नतीजों ने टीएमसी के 15 साल पुराने इस वर्चस्व को समाप्त कर दिया है।
अंतिम संदेश: मुख्यमंत्री ने अपनी हार के लिए प्रशासन और विपक्षी ‘साजिश’ को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि सुवेंदु अधिकारी ने इसे “जनता की जीत और अहंकार का अंत” करार दिया है।
