Monday, September 14, 2026
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​उत्तराखंड सियासत: भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने ‘वायरल पत्र’ को बताया फर्जी, विपक्ष पर साधा निशाना

​उत्तराखंड सियासत: भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने ‘वायरल पत्र’ को बताया फर्जी, विपक्ष पर साधा निशाना

​देहरादून: उत्तराखंड में गदरपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडे की कथित नाराजगी को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया है। विधायक ने खुद सामने आकर उन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उनके पार्टी छोड़ने या संगठन से नाराज होने की बात कही जा रही थी।

​विवाद की शुरुआत: क्या था वायरल पत्र?

​पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर अरविंद पांडे के नाम से एक पत्र वायरल हो रहा था। इस पत्र में चौंकाने वाले दावे किए गए थे:

​विधायक द्वारा कथित तौर पर अपना उत्पीड़न और अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए गए थे।

​कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पत्र को आधार बनाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस्तीफे तक की मांग कर डाली थी।

​विधायक अरविंद पांडे की सफाई: “यह विपक्ष की साजिश”

​देहरादून स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अरविंद पांडे ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:

​पत्र पूरी तरह फर्जी है: विधायक ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित पत्र फर्जी और भ्रामक है। उन्होंने इस तरह का कोई पत्र नहीं लिखा है।

​पार्टी के प्रति निष्ठा: उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भाजपा के अनुशासित सिपाही हैं और संगठन में उन्हें पूरा सम्मान मिल रहा है। उनके और पार्टी के बीच कोई मतभेद नहीं है।

​साजिश का आरोप: पांडे ने इसे विपक्ष की एक “सोची-समझी साजिश” बताया, जिसका उद्देश्य भाजपा की छवि खराब करना और जनता को गुमराह करना है।

​भाजपा और कांग्रेस का स्टैंड

​भाजपा: पार्टी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और कार्यकर्ताओं व जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों और “फेक न्यूज” से सावधान रहें।

​कांग्रेस: फर्जी बताए जाने के बावजूद, विपक्ष इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि पत्र में उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।

​निष्कर्ष: अरविंद पांडे के बयान के बाद फिलहाल भाजपा के भीतर किसी बड़े संकट की संभावना टल गई है। हालांकि, जिस तरह से विपक्ष ने इस ‘फर्जी पत्र’ को मुद्दा बनाया है, उससे आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की उम्मीद है।

 

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